इमरान खान ने तालिबान सरकार को सलाह दी कि वह अफगान लोगों के भीतर से ये खौफ निकालने की कोशिश करे कि अब वहां आतंकवादियों के लिए कोई जगह नहीं है। सुनने में ये बात कुछ अटपटी सी लगती है कि तालिबान अपनी इमेज के खिलाफ ऐसा कर सकता है, लेकिन इमरान खान ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि तालिबान सरकार आतंकियों की सरकार नहीं है और अफगानिस्तान या पाकिस्तान आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह कभी नहीं बन सकता। ऐसा उन्होंने जोर देकर अपने भाषण में कहा।
उन्होंने ये भी एलान किया कि पाकिस्तान हमेशा एक स्थाई, स्थिर और संप्रभु अफगानिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। अफगानिस्तान पर तालिबान के शासन को उन्होंने नई हकीकत का नाम दिया और इसे रहत की बात बताया कि ऐसा बिना किसी युद्ध या किसी का खून बहाए संभव हुआ है। इसे देखते हुए अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में यही है कि अब अफगानिस्तान फिर से टकराव न हो और वहां की स्थितियां सामान्य हों।
इमरान खान ये बताने की कोशिश करते रहे कि अब तक अफगानिस्तान दूसरे मुल्कों की रहमोकरम पर चलता रहा इसीलिए बाहरी मदद हटते ही वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया। लेकिन अब उसे आत्मनिर्भर बनना है और अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करनी है। एक ऐसे आत्मनिर्भर अफगानिस्तान बनाने के लिए पाकिस्तान हर मदद करेगा और अन्य देशों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए। यह एक दुर्लभ मौका है जब अफगानिस्तान में चालीस साल से चल रहा आंतरिक युद्ध खत्म हुआ है।
जाहिर है पाकिस्तान का इस मजबूती के साथ तालिबान के साथ खड़ा होना उसकी दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है और अफगानिस्तान के आम अवाम में पाकिस्तान को लेकर भरोसा पैदा करना भी उसका मकसद है। वह यह बताने की कोशिश कर रहा है कि अगर अफगानिस्तान को आगे बढ़ना है, शांति स्थापित करनी है तो बगैर पाकिस्तान के वह ऐसा नहीं कर सकता।