चुनाव आयोग (ईसीपी) द्वारा इमरान खान और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के 90 फीसदी बड़े नेताओं का नामांकन पत्र खारिज किया जा चुका है। पार्टी ने इसके खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, ईसीपी ने नेशनल असेंबली की दो सीटों मानसहारा और लाहौर से नवाज शरीफ की उम्मीदवारी को मंजूरी दे दी।
निर्वाचन अधिकारियों ने सैन्य प्रतिष्ठान के निर्देश पर देशभर से पीटीआई नेताओं के नामांकन पत्रों को सामूहिक रूप से खारिज कर दिया है। पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, पीटीआई अध्यक्ष चौधरी परवेज इलाही, पूर्व संघीय मंत्रियों मूनिस इलाही और जरताज गुल सहित पीटीआई के कई नेताओं ने सोमवार को उच्च न्यायालय के चुनाव न्यायाधिकरण में उनके नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी है। निर्वाचन अधिकारियों ने राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबली सीटों के लिए रिकॉर्ड 3,500 से ज्यादा उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज किए हैं।
वकील इश्तियाक अहमद ने सोमवार को लाहौर उच्च न्यायालय के अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष एक अपील दायर कर उच्चतम न्यायालय द्वारा आजीवन अयोग्य घोषित किए जाने के शरीफ की उम्मीदवारी को चुनौती दी है।अहमद ने कहा,'नवाज शरीफ के दस्तावेज को स्वीकार करना गैरकानूनी है, क्योंकि 2017 में उच्चतम न्यायालय ने पनामा पेपर्स मामले में उन्हें आजीवन अयोग्य करार दिया था।' उन्होंने कहा कि देश के कानून के मुताबिक वह आठ फरवरी को होने वाला चुनाव नहीं लड़ सकते।
सैन्य प्रतिष्ठान पहले ही शरीफ को चौथी बार प्रधानमंत्री के रूप में पेश कर रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, सेना ने रिकॉर्ड चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के उनके रास्ते में आने वाली सभी कानूनी और अन्य बाधाओं को दूर कर दिया है।
उन्होंने कहा,'सैन्य प्रतिष्ठान यह सुनिश्चित कर रहा है कि इमरान खान और उनकी पार्टी चुनाव भी नहीं लड़ सके और अब तक किए गए सभी आवश्यक उपायों और रणनीतियों ने सेना को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।' इस बीच, ईसीपी ने दावा किया कि मियांवाली और लाहौर शहरों में नेशनल असेंबली की दो सीटों के लिए इमरान खान का नामांकन पत्र 'नैतिक' और तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में उनकी दोषसिद्धि सहित अन्य आधारों पर खारिज कर दिया गया।