उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब की दो सदस्यीय खंडपीठ ने फैसला सुनाया। तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की अल-अजीजिया स्टील मिल और एवनफील्ड भ्रष्टाचार मामलों में सुरक्षात्मक जमानत की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह फैसला सुनाया।
उनकी पार्टी ने अपीलों की बहाली का जश्न मनाते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'न्याय की बहाली के लिए पूरे पाकिस्तान को बधाई। बड़ी संख्या में उनके समर्थक उच्च न्यायालय की इमारत के बाहर जमा हो गए और उनके समर्थन में नारे लगाने लगे।'
शरीफ को इससे पहले 24 अक्तूबर तक के लिए सुरक्षात्मक जमानत दी गई थी, जब वह आत्मसमर्पण करने के लिए अदालत में पेश हुए थे और दोनों मामलों में अपनी अपीलों को फिर से शुरू करने के लिए याचिकाएं भी दायर की थीं। अदालत ने शुरुआती सुनवाई के बाद राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) को नोटिस जारी किया था और सुनवाई आज तक के लिए स्थगित कर दी थी।
सुनवाई के दौरान एनएबी के अभियोजक ने अदालत को बताया कि भ्रष्टाचार निरोधक निगरानी संस्था (एनएबी) नवाज शरीफ की गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं ले रही है, जबकि उनके वकील ने अपीलों को बहाल करने पर जोर दिया। एनएबी ने शरीफ के वकीलों की याचिका का विरोध करने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसकी घोषणा उसने बाद में की।
मंगलवार को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की कार्यवाहक सरकार ने अल-अजीजिया भ्रष्टाचार मामले में शरीफ की सात साल की सजा निलंबित कर दी थी। शरीफ को अल-अजीजिया स्टील मिल्स भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया गया था और दिसंबर 2018 में सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने उस समय कहा था कि अल-अजीजिया मामले में उनके खिलाफ ठोस सबूत हैं।
उन्हें जुलाई 2018 में एवेनफील्ड संपत्ति मामले में एक जवाबदेही अदालत ने भी दोषी ठहराया था और 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। उन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल में डाल दिया गया, लेकिन जमानत दिए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया, जबकि मामले में बरी किए जाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित थी। शरीफ की बेटी मरियम नवाज को भी एवेनफील्ड मामले में सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन सितंबर 2022 में उन्हें उनके पति मुहम्मद सफदर के साथ बरी कर दिया गया था।