चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादार में कई बड़े प्रोजेक्ट्स के निर्माण में जुटा हुआ है। जिसका बड़े पैमाने पर विरोध किया जा रहा है। जिसके कारण परियोजना में लगे चीनी कर्मचारियों के सामने सुरक्षा संबंधी खतरे हैं। इस बीच, यह सामने आया है कि सुरक्षा कारणों के कारण चीनी इंजिनियरों ने बीते साल जुलाई माह में खैबर पख्तूनख्वा के स्वात और शांगला जिलों में जलविद्युत परियोजनाओं पर काम रोक दिया था। इन परियोजनाओं पर अभी भी काम दोबारा चालू नहीं हुआ है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि देश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बीच सुरक्षा एजेंसियों को चीनी इंजीनियरों के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा गया था। हालांकि अभी इलाके में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
बीआरआई के तहत चल रही परियोजनाओं का विरोध
बीआरआई के तहत पाकिस्तान में कई एक्सप्रेस-वे, हवाई अड्डे और बंदहगाह बनाए जा रहे हैं। लेकिन इस परियोजना का जैसा विरोध ग्वादार में हुआ है, वैसा कहीं और देखने को नहीं मिला। विरोधी संगठन हक दो तहरीक की मांग है कि उस इलाके में बनाए गए सुरक्षा चेक-प्वाइंट्स की संख्या घटाई जाए, ट्रावलिंग से समुद्र में मछली मारने पर रोक लगे, और ईरान के साथ सीमा पार व्यापार पर लगी पाबंदियों में ढील दी जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक इन मांगों का ग्वादार परियोजना से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन वहां के निवासियों के एक बड़े हिस्से की राय है कि उनकी सभी समस्याओं की जड़ बीआरआई परियोजना ही है।
विरोध के कारण चीनी इंजीनियरों ने स्वात में 84 मेगावॉट की मिटिलटन जलविद्युत परियोजना पर काम रोक दिया था। साथ ही सुरक्षा स्थिति के कारण इंजीनियरों की टीम जुलाई 2022 में इस्लामाबाद चली गई थी। इसी तरह एक चीनी विशेषज्ञ टीम ने भी मई 2022 से शांगला जिले में 11.8 मेगावाट की करोरा जलविद्युत परियोजना पर काम करना बंद कर दिया था।
चीनी इंजीनियरों की सुरक्षा पर बैठक में हुई चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुद्दे पर सोमवार को ऊर्जा और ऊर्जा सचिव निसार अहमद खान की अध्यक्षता में एक बैठक भी की गई है। इस बैठक में सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि अरबों रुपये की लागत वाली इन जलविद्युत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। साथ ही बैठक में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई विकल्पों पर चर्चा की गई। इन विकल्पों के मुताबिक, विदेशी इंजीनियरों के लिए बुलेट प्रूफ वाहनों की व्यवस्था की जाएगी और फुलप्रूफ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही परियोजना पर काम जारी रखने के लिए एक एकीकृत रणनीति अपनाई जाएगी।
मौलाना हिदायत उर रहमान ने दी चीनी नागरिकों को चेतावनी
इस बीच, ग्वादर राइट्स मूवमेंट के नेता मौलाना हिदायत उर रहमान ने चीनी नागरिकों को ग्वादर बंदरगाह क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी दी है। अपनी चेतावनी में मौलाना हिदायत ने कहा है कि अगर सरकार उनके शांतिपूर्ण विरोध को 'अनदेखा' करती है, तो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हथियार उठाने और उपयोग करने का अधिकार है। ग्वादार में 50 दिन से भी अधिक समय एक धरना चल रहा है। इसका नेतृत्व ‘हक दो तहरीक’ नाम का संगठन कर रहा है। इस संगठन के नेता मौलाना हिदायत-उर-रहमान ने अल्टीमेटम जारी किया है। हक दो तहरीक वहां बन रहे ग्वादार ईस्ट बे एक्सप्रेस-वे के साथ-साथ ग्वादार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का भी विरोध कर रहे हैं।
बताया जाता है कि ग्वादार में मौजूद चीनी नागरिकों की संख्या 500 से कम है। ये सभी ग्वादार बंदरगाह परिसर में रहते हैँ। स्थानीय पर्यवेक्षकों के मुताबिक रहमान की ताजा धमकी से चीनी नागरिकों में भय फैलना लाजिमी है। रहमान ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो बीआरआई से जुड़ी चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना पर सारे काम वे रुकवा देंगे।