इन दिनों पकिस्तान काफी बुरी आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है। आए दिन महंगाई से परेशान लोगों के बीच झड़पें सामने आती हैं। इस बीच स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज दर में बड़े पैमाने पर 300 आधार अंकों (बीपीएस) की वृद्धि की है, जो इसे रिकॉर्ड उच्च स्तर 20 फीसदी तक ले गई है।
पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने बढ़ती महंगाई का मुकाबला करने के लिए जनवरी 2022 से कुल वृद्धि को 1,050 बीपीएस तक ले जाते हुए ब्याज दर में 300 बीपीएस की वृद्धि की। स्थानीय खबरों के मुताबिक मौद्रिक नीति समिति की बैठक 16 मार्च को होने वाली थी। हालांकि, एमपीसी ने रिकॉर्ड मुद्रास्फीति संख्या सहित अर्थव्यवस्था के लिए उभरते जोखिमों से निपटने के लिए इसे आगे करने का फैसला किया, जो फरवरी में लगभग 50 साल के उच्च स्तर 31.5 प्रतिशत पर पहुंच गया।
एसबीपी ने दो मार्च को एक ट्वीट में लिखा कि मौद्रिक नीति समिति ने आज अपनी बैठक में नीतिगत दर को 300 आधार अंकों से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला किया। वहीं एक अन्य ट्वीट में, एसबीपी ने लिखा कि यह निर्णय मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण में गिरावट और हाल के बाहरी और राजकोषीय समायोजन के बीच इसकी उम्मीदों को दर्शाता है।
पाकिस्तान में इस समय मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 31.7 फीसदी है। फरवरी में खाद्य और पेट्रोलियम को छोड़ कर अन्य क्षेत्रों की मुद्रास्फीति दर शहरों में 17.1 और ग्रामीण इलाकों में 21.5 फीसदी दर्ज की गई। विश्लेषकों के मुताबिक ब्याज दर में भारी बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति दर में कुछ गिरावट आ सकती है, लेकिन इससे देश का आर्थिक विकास बुरी तरह प्रभावित होगा।
आईएमएफ ने महंगाई दर पर काबू पाने और राजकोषीय सेहत दुरुस्त करने की शर्त लगा रखी है। शहबाज शरीफ सरकार ने राजकोषीय सेहत ठीक करन के लिए हाल में कई कदम उठाए हैं, जिनमें बिक्री कर और उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी, ऊर्जा की कीमतों में इजाफा और सरकार खर्च घटाने के कदम शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से उसका घाटा कम होगा।