मानवाधिकार आयोग ने कहा कि जिला प्रशासन नियमित रूप से शांतिपूर्ण विधानसभा के अधिकार को चुनौती देता है क्योंकि विवादास्पद तख्तियां, आम जनता और धार्मिक संगठनों से मजबूत आरक्षण जाहिर तौर पर कानून और व्यवस्था के लिए खतरा है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर लाहौर समेत अन्य शहरों में निकलने वाली सार्वजनिक रैली औरत मार्च के आयोजकों को अनुमति देने से जिला प्रशासन ने इनकार कर दिया। मानवाधिकार आयोग ने लाहौर जिला प्रशासन के फैसले की कड़ी निंदा की है।
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मानवाधिकार आयोग ने कहा कि जिला प्रशासन नियमित रूप से शांतिपूर्ण विधानसभा के अधिकार को चुनौती देता है क्योंकि विवादास्पद तख्तियां, आम जनता और धार्मिक संगठनों से मजबूत आरक्षण जाहिर तौर पर कानून और व्यवस्था के लिए खतरा है। प्रशासन को औरत मार्च में भाग लेने वालों के शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और उनकी पूरी सुरक्षा की गारंटी देनी चाहिए।
2018 में निकाला गया था पहला औरत मार्च
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए, पाकिस्तान में महिलाएं औरत मार्च आयोजित करती हैं। यह मार्च लाहौर, हैदराबाद, सुक्कुर, फैसलाबाद, मुल्तान, क्वेटा, कराची, इस्लामाबाद और पेशावर समेत अन्य शहरों में हर साल निकाला जाता है। पहला औरत मार्च 2018 में कराची में निकाला गया था। औरत मार्च महिलाओं के लिए मजदूरी, सुरक्षा और शांति पर केंद्रित है। कराची प्रेस क्लब (केपीसी) में एक संवाददाता सम्मेलन में सामाजिक कार्यकर्ता सीमा करमानी ने कहा, पिछले साल के औरत मार्च का नारा उजरत, तहफुज और सुकून था।