जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार के सख्त रुख और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान की तरफ से बौखलाहट में नए नए कदम उठाए जा रहे हैं। इमरान खान की सरकार ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल अगले 3 वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। सेवा विस्तार जावेद बाजवा के रिटायर होने के महज तीन महीने पहले आया है।
पाक पीएम ऑफिस ने जानकारी दी कि देश में अमन और शांति को लेकर इमरान खान ने बाजवा का कार्यकाल बढ़ाया है। पाक मीडिया की तरफ से ये जानकारी दी गई है। हालांकि, इमरान खान इस से पहले जनरल कियानी को एक्सटेंशन दिए जाने की खिलाफत कर चुके हैं।
डॉन डॉट कॉम की खबर के मुताबिक यह निर्णय देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस अधिसूचना पर व्यक्तिगत रूप से प्रधान मंत्री इमरान ने हस्ताक्षर किए हैं। जम्मू-कश्मीर में बने हालात में पाकिस्तान के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है।
जनरल बाजवा को तीन वर्षों का एक्सटेंशन देने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जनरल अशफाक परवेज कियानी को एक्सटेंशन दिए जाने की पुरजोर खिलाफत कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर हम किसी को बढ़ावा देते हैं तो हम अपने कानून की खिलाफत करते हैं और उसे कमजोर करते हैं।
इमरान खान ने कहा था कि जंग के अंदर भी प्रथम विश्व युद्ध और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी किसी को एक्सटेंशन नहीं दिया गया था। कानून तोड़कर, आप संस्थानों को नष्ट करते हैं। जो जनरल मुशर्रफ ने किया।
2016 में हुए थे नियुक्त
कमर जावेद बाजवा ने 29 नवंबर 2016 को सेवानिवृत्त हुए जनरल राहिल शरीफ का स्थान लिया था। बाजवा के नाम पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुहर लगाई थी। कश्मीर मुद्दों के खास तौर पर जानकार माने जाने वाले बाजवा के पास भारत के साथ लगी नियंत्रण रेखा का भी लंबा अनुभव है।
बाजवा की नियुक्ति के तुरंत बाद ही पाकिस्तान के मीडिया चैनलों पर कई सैन्य विशेषज्ञों ने इस बात को स्वीकार किया था कि इस नियुक्ति में किसी चीज ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है तो वह है कि बाजवा का नियंत्रण रेखा पर अनुभव।
बाजवा पाकिस्तानी सेना मुख्यालय जीएचक्यू में जिस पद पर थे उसी पद पर पहले राहील शरीफ भी थे। यहां रहते हुए पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी विंग 10 कॉर्प्स को कंट्रोल किया जाता है, जिसके जिम्मे एलओसी की सुरक्षा है।
दरअसल बाजवा कश्मीर ऑपरेशंस पर बेहद रुचि लेते हैं और कट्टर विचारधारा के हैं। इस वजह से एक्सपर्ट्स का मानना था कि यदि सेना प्रमुख का ओहदा उन्हें मिला तो वो खुद अपने मुल्क पाकिस्तान के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
बाजवा ने कांगो में यूएन मिशन के दौरान पूर्व भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह की डिवीजन में काम किया था। बाजवा को इसलिए भी डार्क हॉर्स माना गया था क्योंकि उनका संबंध क्वेटा के इंफेन्ट्री स्कूल और बलोच रेजीमेंट से है। इसी रेजीमेंट से पूर्व सेना प्रमुख जनरल याह्या खान, जनरल असलम बेग और जनरल कियानी भी आगे बढ़े थे।
कमर जावेद बाजवा सोशल मीडिया पर भी नहीं हैं। पाकिस्तानी सेना ने साफ किया था कि नवनियुक्त सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा सोशल मीडिया पर मौजूद नहीं हैं। इस मंच पर उनके नाम पर जो अकाउंट हैं वो सभी फर्जी हैं।
सेना की मीडिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम बाजवा ने कहा कि जनरल कमर बाजवा का सोशल नेटवर्किंग साइटों पर कोई भी अकाउंट नहीं है। उनके नाम पर फेसबुक, ट्विटर या दूसरे सोशल मीडिया पर बनाए गए अकाउंट फर्जी हैं।