चुनाव का मुद्दा पाकिस्तानी राजनीति में केंद्र में आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में समय पर चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। शीर्ष कोर्ट ने चार अप्रैल को संघीय सरकार को आदेश दिया था कि वह ईसीपी को सोमवार तक 21 अरब रुपये मुहैया कराए ताकि वह पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा प्रांतों में चुनाव करा सके। इन दोनों प्रांतों में पहले इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार रही है।
हालांकि, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने चुनाव कराने के लिए ईसीपी के लिए आवश्यक पैसा जारी करने को लेकर सोमवार को संसद में 'आम चुनाव (पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय असेंबली) के लिए राशि विधेयक 2023' नामक एक विधेयक पेश किया।
नेशनल असेंबली के स्पीकर द्वारा चर्चा के लिए वित्त और राजस्व पर सदन की स्थायी समिति को भेजे गए विधेयक को गुरुवार को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष कोर्ट ने पाकिस्तान चुनाव आयोग को 10 अप्रैल तक धन मुहैया कराने के अदालत के चार अप्रैल के फैसले के बावजूद आवश्यक पैसे की व्यवस्था करने में सरकार की विफलता के मामले की सुनवाई की।
चीफ जस्टिस (सीजेपी) उमर अता बंदियाल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति ने मामले की सुनवाई की, जहां पाकिस्तान स्टेट बैंक (एसबीपी) की उप गवर्नर सिमा कामिल और अटॉर्नी जनरल मंसूर अवान सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। सुनवाई के बाद चीफ न्यायाधीश ने एसबीपी को 21 अरब रुपये जारी करने और 17 अप्रैल तक वित्त मंत्रालय को इस संबंध में उचित सूचना भेजने का आदेश दिया।
अदालत ने पहले ही 14 मई को पंजाब में चुनाव कराने का आदेश दिया था, लेकिन चुनाव आयोग इस कवायद को अंजाम देने के लिए धन की अनुपलब्धता के कारण विफल हो गया था। सरकार बिगड़ती आर्थिक स्थिति का बहाना बनाकर पैसा जारी करने से बच रही है। हालांकि, शीर्ष कोर्ट इस बात पर अड़ी है कि चुनाव समय पर हों। अदालत 10 अप्रैल तक 21 अरब रुपये मुहैया कराने के आदेश को लागू करने में संघीय सरकार की विफलता को लेकर दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रही है।
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