पाकिस्तान का सबसे बड़ा चिड़ियाघर 145 साल के बाद बंद होने के कगार पर है। दरअसल, यहां जानवरों के रहने की स्थिति बहुत खराब है। उन्हें बुरे व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें ठीक से खाना भी नहीं खिलाया जा रहा है।
नूरजहां नाम के एक 17 वर्षीय हाथी के साथ दुर्व्यवहार की खबरों के बाद संघीय और सिंध सरकारें कराची स्थित देश के इस दूसरे सबसे पुराने चिड़ियाघर को बंद करने पर विचार कर रही हैं। इससे पहले हाथी खराब स्वास्थ्य स्थिति में पाया गया था। सफल सर्जरी से गुजरने के बावजूद महीनों तक अपर्याप्त देखभाल के कारण हाथी की स्थिति और खराब हो गई है।
प्रांतीय सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, रहने की स्थिति बहुत खराब है और जानवरों की स्पष्ट रूप से देखभाल नहीं की जाती है। पशुओं को ठीक से चारा न दिए जाने की शिकायतें मिली हैं। इसलिए चिड़ियाघर को बंद करने का विकल्प विचाराधीन है, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री और सांसद शेरी रहमान और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने मनोरंजन पार्क और चिड़ियाघर को बंद करने का सुझाव दिया है। अधिकारी ने कहा, हम जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने पर विचार कर रहे हैं।
प्रांतीय सरकार ने जानवरों के प्रति लापरवाही और क्रूर व्यवहार के लिए चिड़ियाघर के निदेशक खालिद हाशमी को पहले ही हटा दिया है, विशेष रूप से नूरजहां जो पिछले हफ्ते चिड़ियाघर में अपने छोटे से बाड़े के अंदर एक कंक्रीट के तालाब में गिरने के बाद से अपनी जिंदगी के लिए लड़ रही है।
एक वैश्विक पशु कल्याण संगठन के पशु चिकित्सकों की एक टीम ने चिड़ियाघर का दौरा किया और नूरजहां और बीमार अन्य जानवरों का इलाज किया। नूरजहां उन चार अफ्रीकी हाथियों में से एक है, जिन्हें 2009 में कराची लाया गया था। नूरजहां और मधुबाला को कराची चिड़ियाघर में रखा गया जबकि मलिक और सोनू को सफारी पार्क ले जाया गया था।
कई खबरों में चिड़ियाघर के रखवालों और कराची चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा जानवरों के प्रति दिखाई गई क्रूरता पर प्रकाश डाला गया है। जानवरों की खराब जीवन स्थिति को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों की भौंहें तन गई हैं, जो कराची चिड़ियाघर को बंद करने और जानवरों को सुरक्षित अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त धन न होने के कारण जानवर पीड़ित हैं।
उन्होंने कहा, उचित बजट के बिना हम क्या कर सकते हैं? इसके लिए मिलने वाला पैसा सभी जानवरों को ठीक से खिलाने और चिड़ियाघर को साफ-सुथरा रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। 1878 में स्थापित, कराची चिड़ियाघर को पहले महात्मा गांधी गार्डन के नाम से जाना जाता था। यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा चिड़ियाघर है और लाहौर चिड़ियाघर के बाद देश का दूसरा सबसे पुराना चिड़ियाघर है।
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