विशेष अदालत ने 13 सितंबर को साइफर (गोपनीय राजनयिक केबल) लीक मामले में पीटीआई प्रमुख इमरान खान और दो बार विदेश मंत्री रहे शाह महमूद कुरैशी की न्यायिक हिरासत 26 सितंबर तक बढ़ा दी थी। खान और कुरैशी दोनों पर पिछले साल मार्च में पाकिस्तानी दूतावास द्वारा भेजे गए एक दस्तावेज के संबंध में देश के गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।
एक प्रमुख स्थानीय समाचार पत्र की खबर के मुताबिक, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा आगामी सप्ताह के लिए जारी एक कारण सूची में बताया गया है कि मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक इमरान खान की जमानत याचिका पर सोमवार (25 सितंबर) को सुनवाई करेंगे।
इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत ने संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) को नोटिस जारी कर मामले में दलीलें मांगी थीं। सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गठित विशेष अदालत ने मामले में खान और कुरैशी की गिरफ्तारी के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
पिछले महीने एफआईए ने पीटीआई प्रमुख और उनकी पार्टी के उपाध्यक्ष के खिलाफ सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद, दोनों नेताओं को मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत एक विशेष अदालत की स्थापना की गई थी।
तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद इमरान खान को पांच अगस्त से अटक जेल में रखा गया है। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पांच अगस्त को उसकी सजा निलंबित कर दी थी लेकिन वह साइफर मामले में अब भी अटक जेल में बंद है।
पिछले साल मार्च में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले इमरान ने इस्लामाबाद में एक जनसभा में अपनी जेब से कागज का एक टुकड़ा निकाला था और उसे लहराते हुए दावा किया था कि यह उनकी सरकार को गिराने के लिए रची जा रही 'अंतरराष्ट्रीय साजिश' का सबूत है।
हालांकि, 26 अगस्त को जेल में संयुक्त जांच दल (जेआईटी) के साथ पूछताछ के दौरान इमरान खान ने इस बात से इनकार किया कि पिछले साल एक सार्वजनिक सभा में उसने जो कागज लहराया था, वह साइफर था। उन्होंने साइफर खोने की बात भी स्वीकार की और कहा कि उन्हें याद नहीं है कि उन्होंने इसे कहां रखा था।