यह एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज (साइफर) से जुड़ा मामला है। इसको लेकर इमरान खान ने दावा किया था कि पिछले साल इसका इस्तेमाल उन्हें सत्ता से हटाने के लिए किया गया। बाद में यह दस्तावेज उनके कब्जे से गायब हो गया।
एक विशेष अदालत इमरान खान के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही है। खान रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं, जहां उन्हें 26 सितंबर को जिला जेल अटक से स्थानांतरित किया गया था।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख ने चार अक्टूबर को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में जेल में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक ने अदियाला जेल में साइफर मामले की सुनवाई के खिलाफ दायर याचिका खारिज की और खान को इसके लिए विशेष अदालत का रुख करने का निर्देश दिया।
फैसले में कहा गया है कि सुरक्षा संबंधी मामलों को ध्यान में रखते हुए जेल की सुनवाई पूर्व प्रधानमंत्री के पक्ष में थी। पीठ ने कहा, 'जेल की सुनवाई के मामले में कोई दुर्भावना स्पष्ट नहीं है।'
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इमरान खान ने अपनी सुरक्षा को लेकर कई बार चिंता जताई थी। अगर पीटीआई प्रमुख को जेल की सुनवाई को लेकर आपत्ति है तो वह निचली अदालत का रुख कर सकते हैं।'
इस महीने की शुरुआत में अदालत ने घोषणा की थी कि खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को 17 अक्तूबर को अगली सुनवाई के दौरान अभ्यारोपित किया जाएगा, जो मुकदमे की आधिकारिक शुरुआत होगी।
इमरान खान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए अपदस्थ कर दिया गया था। इस्लामाबाद की एक अदालत ने तोशखाना मामले में उन्हें तीन साल कैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें इस साल पांच अगस्त को जेल में रखा गया था।
पीटीआई प्रमुख अपनी सजा काटने के लिए अटक जिला जेल में बंद थे। बाद में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर दी थी, लेकिन फिर उन्हें साइफर मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था।