संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने शनिवार को सरकारी गोपनीयता कानून के तहत स्थापित विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया था। इसमें उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान व उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी को साइफर मामले में मुख्य आरोपी घोषित किया। खान और कुरैशी दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।
एक प्रमुख अखबार की खबर के मुताबिक, एफआईए ने सोमवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को बताया कि साइफर मामले में खान की जमानत याचिका पर खुली सुनवाई से 'अन्य देशों के साथ संबंध बिगड़ने का खतरा' पैदा हो सकता है। विशेष अदालत ने गिरफ्तारी के बाद खान और कुरैशी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
इमरान खान ने पिछले साल मार्च में वॉशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास द्वारा भेजे गए एक गोपनीय राजनयिक केबल (साइबर) का खुलासा किया था। इसके बाद उनके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का कथित तौर पर उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया था। बाद में अगस्त में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। पूर्व विदेश मंत्री कुरैशी को भी विदेश मंत्री रहने के दौरान अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास द्वारा विदेश कार्यालय को भेजे गए आधिकारिक केबल की गोपनीयता का उल्लंघन करने के लिए सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।
26 सितंबर को इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी की न्यायिक हिरासत 10 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई थी और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों के मुताबिक पीटीआई प्रमुख को अटक जिला जेल से रावलपिंडी की अदियाला जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
एफआईए ने पिछले सप्ताह इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर मामले में खान की जमानत याचिका पर बंद कमरे में सुनवाई की मांग की थी। सोमवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक ने एफआईए की याचिका पर सुनवाई की। अभियोजक शाह खावर ने सुनवाई के दौरान कहा,'हमें अदालत के समक्ष अन्य देशों के संबंध में भी बयान पेश करने होंगे। इस तरह के बयानों को खुली अदालत के समक्ष लाने से अन्य देशों के साथ संबंध बिगड़ने का खतरा है।'
अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल (एएजी) मुनव्वर इकबाल डोगल ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष राजनयिक राज्य दस्तावेजों के लिए आचार संहिता भी पेश की। इमरान के वकील सलमान सफदर ने कहा कि मामलों को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए एफआईए का अनुरोध उसके इस रुख के विपरीत है कि पीटीआई प्रमुख पहले ही 'साइफर को सार्वजनिक' कर चुके हैं। इसके बाद इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने इमरान खान की जमानत याचिका पर बंद कमरे में सुनवाई की।