सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
- फोटो : iStock
71 देशों में काम करने वाली संस्था प्लान इंटरनेशनल के एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। संस्था ने यह सर्वे भारत, अमेरिका और ब्राजील समेत 22 देशों में कराया है।
प्लान इंटरनेशनल ने इस अध्ययन में 15 से 25 वर्ष की 14,000 युवतिओं को शामिल किया। सर्वे में 58 फीसदी से ज्यादा लड़कियों ने माना है कि उन्हें ऑनलाइन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। 22 फीसदी लड़कियों ने कहा है कि उन्हें शारीरिक हमलों को लेकर सामान्य तरीके में अपमानजनक भाषा और गाली का सामना करना पड़ा है।
41 फीसदी युवतियों ने कहा कि उद्देश्यपूर्ण शर्मिंदगी ने उन्हें प्रभावित किया। बॉडी शेमिंग और यौन हिंसा के खतरों के कारण 39 फीसदी महिलाओं ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली। इसी तरह से जातीय अल्पसंख्यकों पर हमले, नस्लीय दुर्व्यवहार और एलजीबीटी समुदाय से जुड़ी युवतियों का उत्पीड़न बहुत ज्यादा था।
सर्वे में पाया गया है कि ऑनलाइन उत्पीड़न के कारण हर पांच में से एक युवती ने सोशल मीडिया का उपयोग बंद कर दिया या फिर कम कर दिया। सोशल मीडिया पर उत्पीड़न झेलने के बाद हर 10 महिलाओं में से एक ने सोशल मीडिया पर अपनी अभिव्यक्ति के तरीके को बदल दिया।
'महिलाओं की आजादी पर संकट'
संस्था की सीईओ ऐनी-बिर्गिट्टे अल्ब्रेक्टसेन के मुताबिक सोशल मीडिया पर यह उत्पीड़न शारीरिक नहीं, लेकिन यह महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खतरा होते हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम का कहना है कि वे ऑनलाइन दुर्व्यवहार से जुड़ी रिपोर्ट की निगरानी करते हैं। फिर परेशान करने वाली सामग्री की पहचान कर कार्रवाई करते हैं। हालांकि इस सर्वे में दुरुपयोग को रोकने में रिपोर्टिंग करने की तकनीक अप्रभावी रही।