जापान के संसदीय चुनाव में अपनी सत्तारूढ़ पार्टी की जीत के बाद फुमियो किशिदा एक बार फिर प्रधानमंत्री चुने गए हैं। करीब एक पूर्व संसद ने उन्हें प्रधानमंत्री चुना था, जिसके बाद उन्होंने तत्काल चुनाव कराने की घोषणा की। उनकी पार्टी ने 465 सदस्यीय निचले सदन में 261 सीटें जीती हैं। इस जीत को महामारी से निपटने व खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।
बुधवार को ही फुमियो किशिदा ने मंत्रिमंडल का गठन किया जिसमें लगभग सभी पुराने मंत्रियों को जगह मिली है। पिछले महीने ही ‘लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी’ (एलडीपी) ने किशिदा को प्रधानमंत्री चुना था। 31 अक्तूबर को उन्हें पीएम चुने जाने पर उनकी सत्ता पर पकड़ और मजबूत हो गई। इससे पहले योशिहिदे सुगा ने कोविड-19 के प्रबंधन और महामारी के बीच तोक्यो ओलंपिक कराने के फैसले को लेकर आलोचनाओं के चलते प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
वह एक साल तक प्रधानमंत्री रहे थे। अब फुमियो किशिदा के सामने कोविड-19 पर नियंत्रण, आर्थिक पुनरुद्धार और जापान की रक्षा क्षमता की मजबूती प्रमुख चुनौती हैं। उनकी पार्टी को गठबंधन सहयोगी कोमेइतो के साथ मिलकर 293 सीटें मिली हैं जो बहुमत के 233 के आंकड़े से अधिक हैं। हालांकि पिछली बार लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को 305 सीटें मिली थीं।
इस बार कम मिल सकीं सीटें
जापान में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को पिछली बार 305 सीटें मिली थीं लेकिन इस बार सीटें गंवाने का बड़ा कारण कोरोना वायरस से जूझ रही अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां रहीं। पिछले हफ्ते ही उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन के बहुमत हासिल करने के बाद कहा था, मुझे लगता है कि मतदाताओं ने हमें जनादेश दिया है। अब हमारी सरकार का काम कोविड-19 नियंत्रण, रक्षा व अर्थव्यवस्था सुधारना है।
चीन व उत्तर कोरिया से निपटना होगा
जापान का प्रधानमंत्री बनने के बाद फुमियो किशिदा को घरेलू चुनौतियों से तो निपटना ही है, साथ ही चीन और उत्तर कोरिया से आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से भी मुकाबला करना होगा। उत्तर कोरिया आए दिन मिसाइल और अन्य घातक हथियारों का परीक्षण कर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है। जबकि चीन भी दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करने के लिए नई-नई तरह की तरकीबें अपना रहा है।
योशिहिते सुगा की लेंगे जगह
इससे पहले योशिहिते सुगा के इस्तीफे के बाद संसद के सदस्यों ने किशिदा को ही प्रधानमंत्री चुना थी। पीएम बनते ही उन्होंने संसद भंग करके तत्काल चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी। प्रधानमंत्री बनने से पहले किशिदा पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुके हैं।
एक महीने पहले ही चुना गया था पीएम
फुमियो किशिदा को संसद भंग होने से एक महीने पहले ही प्रधानमंत्री चुना गया था। इसके बाद उन्होंने समय से पहले संसद भंग करके चुनाव कराने का ऐलान कर दिया था। माना जा रहा था कि कोरोना महामारी से निपटने ओर खस्ताहाल हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने जल्द चुनाव की घोषणा कर दी थी। पीएम चुने जाने के बाद सत्ता पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई थी।