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US: ‘चंद्रयान की तरह अमेरिका-भारत संबंध पहुंचेंगे चांद से भी और आगे', वॉशिंगटन में बोले जयशंकर

Sun, 01 Oct 2023 08:09 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

'कलर्स ऑफ इंडिया' कार्यक्रम में भारत-अमेरिका संबंधों पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि आज हर तरह से यह रिश्ता उम्मीदों से अधिक मजबूत हो गया है। यही कारण है कि आज इसे परिभाषित करने की कोशिश भी नहीं करते हैं। 
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EAM Dr S Jaishankar - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं और मोदी सरकार इसे एक अलग स्तर पर ले जाने जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चंद्रयान की तरह द्विपक्षीय संबंध भी मजबूत होंगे। अमेरिका-भारत संबंध चांद से भी और आगे तक जाएंगे। साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी को याद किया। 

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दरअसल, विदेश मंत्री ने शनिवार को वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित 'सेलिब्रेटिंग कलर्स ऑफ फ्रेंडशिप' कार्यक्रम में भाग लिया था। यहां उन्होंने अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से इंडिया हाउस में एकत्र हुए सैकड़ों भारतीय-अमेरिकियों को संबोधित किया। जयशंकर ने कहा कि जी-20 की सफलता अमेरिका के समर्थन के बिना नहीं हो सकती थी। उन्होंने कहा, ‘मेजबान के रूप में, जब चीजें अच्छी होती हैं, तो मेजबान को हमेशा श्रेय मिलता है। यह उचित है, लेकिन, अगर जी-20 के सभी सदस्य इसकी सफलता के लिए काम नहीं करते तो जी-20 एक साथ नहीं आ पाता।’

गांधी जी का संदेश

विदेश मंत्री ने कहा कि हम गांधी जी के कथन को कई बार दोहराते हैं। उन्होंने बहुत सारी बातें स्पष्टता से कहीं हैं। अब सवाल उठता है कि उनका संदेश क्या था? उनका संदेश सही काम करने, सभ्य काम करने और किसी को भी पीछे न छोड़ने के बारे में था। 

दिल्ली में हुए सफल जी-20 शिखर सम्मेलन पर विदेश मंत्री ने कहा, ‘गांधी जी का संदेश बहुत जटिल है, लेकिन इसका सार वास्तव में बहुत, बहुत सरल है। जब हमने जी-20 की अध्यक्षता संभाली तो कई मायनों में उनका संदेश हमारी सोच में था।’ उन्होंने कहा कि वह सिर्फ इसलिए यह बात नहीं बोल रहे क्योंकि जी-20 सफल हुआ। 

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किसी को पीछे मत छोड़ो
उन्होंने आगे कहा, ‘जी-20 में हमने जो करने की कोशिश की, उसकी सोच यही थी कि हम भारत में क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं सोचता हूं कि भारत-अमेरिका को दुनिया के साथ क्या करना चाहिए, वो यह है कि किसी को पीछे मत छोड़ो।’


दोनों देशों के बीच भरोसेमंद रिश्ते
'कलर्स ऑफ इंडिया' कार्यक्रम में भारत-अमेरिका संबंधों पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, ‘आज मेरे लिए वास्तव में इस संबंध को परिभाषित करना कठिन है। आज हर तरह से यह रिश्ता उम्मीदों से अधिक मजबूत हो गया है। यही कारण है कि आज हम इसे परिभाषित करने की कोशिश भी नहीं करते हैं। हम संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।’ 

उन्होंने कहा, ‘मैं कहूंगा कि आज भारत और अमेरिका ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां हम वास्तव में एक-दूसरे को बहुत सकारात्मक भागीदारों के रूप में देखते हैं। हमारे बीच की केमिस्ट्री देखकर मुझे आगे की संभावनाएं दिखती हैं।’

जयशंकर ने कहा, ‘यदि आप हाल की कुछ चीजों को देखें जो भारत और अमेरिका ने मिलकर की हैं, तो वे सभी 'आई' अक्षर से शुरू होती हैं। इसलिए हमने अभी इस मध्य पूर्वी गलियारे के बारे में बात की। इसे IMEEC यानी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा कहा जाता है। आप सभी आज हिंद-प्रशांत शब्द से परिचित हैं। तो स्पष्ट रूप से, आप जानते हैं, 'आई' अक्षर संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए अच्छा है।’

उन्होंने दोनों देशों के संबंधों पर कहा, ‘मैंने अस्सी के दशक में एक ऐसे समय में शुरुआत की थी जब आपको यह बताना पड़ता था कि आप कहां से हैं, आप किस बारे में हैं, आप जानते हैं, यहां कांग्रेस के सदस्यों को देखना अच्छा है। वे कठिन दिन हैं, आप जानते हैं, उन्होंने आपको कांग्रेस के कमरों में भी नहीं जाने दिया। पर अगर कोई यात्रा को देखता है, तो हम कितनी दूर आ गए हैं, यह संबंध (भारत-अमेरिका संबंध) कितना गहरा और व्यापक हो गया है। आज सरकार में ऐसा कोई विभाग नहीं है, जिसका अपने भारतीय या अमेरिकी समकक्षों के साथ कोई लेन-देन नहीं है।’

दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत को अमेरिकी समर्थन पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, ‘विशेष रूप से, मुझे अवश्य कहना चाहिए, क्योंकि मैं आज इस देश में हूं, जी 20 को सफल बनाने के लिए हमें संयुक्त राज्य अमेरिका से जो योगदान, समर्थन और समझ मिली है, मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे मैं निश्चित रूप से सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना चाहूंगा। मेरे लिए जी-20 की सफलता भारत-अमेरिका साझेदारी की सफलता भी थी। इसलिए एक बार फिर, आप सभी को देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।’

विदेश मंत्री जयशंकर ने चंद्रयान-3 की सफलता पर भी बात की। उन्हों कहा, ‘मैंने आपसे इसका जिक्र इसलिए किया क्योंकि यह एक बड़ी उपलब्धि है। हां, हम विशेष क्लब में शामिल हो गए हैं, लेकिन आज कई मायनों में, नया भारत चंद्रयान का भारत है, यह कोविन का भारत है, यह फाइव जी का भारत है। आज के भारत को अमेरिका भी देख रहा है। यह वह भारत है, जिसके साथ संयुक्त राज्य अमेरिका वास्तव में और अधिक निकटता से काम करने की इच्छा रखता है।’

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