नेपाल कोरोना महामारी की नई लहर झेल रहा है। कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण यहां तेजी से फैल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में बीते रविवार के बाद से रोज नए संक्रमण के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इस संख्या में हर दिन बढ़ोतरी हुई है। कुल टेस्ट के बीच पॉजिटिविटी रेट साढ़े नौ फीसदी से ऊपर से हो गई है। आलोचकों का कहना है कि नेपाल सरकार ने महामारी की पहली लहर से कोई सबक नहीं सीखा। उसी का नतीजा है कि ओमिक्रॉन लहर ने देश में जन जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
29 जनवरी तक स्कूल बंद
हाल में संक्रमण के मामलों में इजाफा होने के बाद सरकार ने कई कदम उठाए। इसके तहत सार्वजनिक स्थलों और सरकारी दफ्तरों में लोगों के आने की संख्या सीमित कर दी गई। नौ देशों से आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। देश में स्कूलों को 29 जनवरी तक बंद रखने की घोषणा की गई है।
लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने अभी भी सिर्फ फौरी कदम उठाए हैं। उसने कोई दीर्घकालिक रणनीति नहीं बनाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण मान शाक्य ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘जबसे महामारी शुरू हुई, हमने अधिकारियों को सतर्क रहने और बदलते हालत के मुताबिक रणनीति तैयार करते रहने का सुझाव दिया है। लेकिन यहां अधिकारी आखिरी वक्त पर आ कर ही जागते हैं।’
सरकारी अधिकारियों ने भी माना है कि महामारी की ताजा लहर आने तक उनके पास इससे निपटने की कोई योजना नहीं थी। जब ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामले बढ़ रहे थे, तब भी इसे रोकने की कोई योजना नहीं बनाई गई। सरकार के महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण विभाग से जुड़ीं अधिकारी डॉ. हेमलता चंद्र ओझा ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘हम अभी कार्ययोजना तैयार करने में जुटे हुए हैं। ये रैपिड एक्शन प्लान अपनी तैयारी के अंतिम चरण में हैं। हम इस पर जल्द ही अमल करेंगे।’
स्वास्थ्य विशेषज्ञों से नहीं किया राय-मशविरा
कई डॉक्टरों का आरोप है कि असाधारण हालात के मुताबिक सरकार ने कोई उपाय लागू नही किए हैं। सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से कभी राय-मशविरा नहीं किया। जबकि विशेषज्ञ नई लहर आने की चेतावनी लगातार दे रहे थे। बीते नवंबर में ही दक्षिण अफ्रीका से ओमिक्रॉन वैरिएंट के फैलने की खबर आने लगी थी। लेकिन विदेश से आने वाले यात्रियों की निगरानी के बारे में सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया। अब जाकर यात्रा प्रतिबंध लगाए गए हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ डॉ. शरद ओन्ता ने कहा- ‘ऐसा लगता है कि नेपाली अधिकारी अब अमेरिका सहित कुछ दूसरे देशों की नकल कर रहे हैं। उनका ताजा फैसला गलत नहीं है, लेकिन अब उससे कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि संक्रमण देश में फैल चुका है।’
जानकारों के मुताबिक नेपाल में टीकाकरण की रफ्तार भी काफी धीमी रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि नेपाल के पास कोरोना वैक्सीन के पर्याप्त डोज नहीं हैं। अब तक देश में सिर्फ 37 फीसदी बालिग आबादी को ही कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लग पाए हैं।