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पाकिस्तान की पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति: भारत के साथ शांति स्थापित करने और व्यापार के लिए तैयार, लेकिन रखी ये शर्त 

Wed, 12 Jan 2022 06:42 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हम अगले 100 वर्षों तक भारत के साथ दुश्मनी नहीं चाहते हैं। नई नीति तत्काल पड़ोसियों के साथ शांति चाहती है। 
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भारत-पाकिस्तान संबंध - फोटो : iStock
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विस्तार
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एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपनी पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के तहत भारत सहित अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने के लिए तैयार है। इसमें कहा गया है कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के बिना भी नई दिल्ली के साथ व्यापार के लिए पाकिस्तान के दरवाजे खुले हैं, बशर्ते द्विपक्षीय वार्ता में प्रगति हो। पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति और कैबिनेट द्वारा अलग से अनुमोदित राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का शुक्रवार को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा अनावरण किया जाना है।

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नजदीकी पड़ोसियों के साथ शांति और आर्थिक कूटनीति का जिक्र
एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने मंगलवार को बताया कि नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में नजदीकी पड़ोसियों के साथ शांति और आर्थिक कूटनीति पाकिस्तान की विदेश नीति का केंद्रीय विषय होगा। 2022-26 के बीच की अवधि को कवर करने वाला पांच साल का नीति दस्तावेज, पाकिस्तान सरकार द्वारा देश की अपनी तरह का पहला रणनीति पत्र के रूप में तैयार किया गया दस्तावेज है जो अपेन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टि और दिशानिर्देशों को बताता है।

100 पृष्ठों के इस दस्तावेज को गुप्त रखा जाएगा
अधिकारी के हवाले से अखबार ने कहा कि 100 पृष्ठों के इस दस्तावेज को गुप्त रखा जाएगा, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान के बिना भारत के साथ व्यापार और व्यापारिक संबंधों के लिए दरवाजा खुला छोड़ा जाएगा, बशर्ते कि दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच बातचीत में प्रगति हो। अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हम अगले 100 वर्षों तक भारत के साथ दुश्मनी नहीं चाहते हैं। नई नीति तत्काल पड़ोसियों के साथ शांति चाहती है। 
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अधिकारी ने कहा कि अगर बातचीत और प्रगति होती है तो भारत के साथ व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को सामान्य बनाने की संभावना होगी जैसा कि पहले हुआ था। 2016 में पठानकोट एयर फोर्स बेस पर पाकिस्तान से आए आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में दरार आ गई थी। उरी में भारतीय सेना के कैंप पर हमले ने रिश्ते को और खराब कर दिया।

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