उत्तर कोरिया ने कथित तौर पर तीस नाबालिग छात्रों की सामूहिक रूप से हत्या कर दी, क्योंकि उन्होंने दक्षिण कोरिया का टीवी शो देखा था। दक्षिण कोरिया के दैनिक समाचार पत्र 'जोंगआंग डेली' ने अपनी खबर में यह जानकारी दी।
स्थानीय केबल टीवी चैनल 'चोसुन' ने दक्षिण कोरिया सरकार के एक अधिकारी का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने पिछले हफ्ते माध्यमिक विद्यालय के छात्रों को सार्वजनिक रूप से गोली मारी। छात्रों ने कथित तौर पर यूएसबी पर संग्रहित दक्षिण कोरियाई नाटक देखे थे। इन यूएसबी को कथित तौर पर पिछले महीने सिओल से गुब्बारों के जरिए उत्तर कोरिया भेजा गया था।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने रिपोर्ट की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर गुरुवार को पत्रकारों से कहा, यह सर्वविदिति है कि उत्तर कोरियाई अधिकारी 'प्रतिक्रियावादी विचारधारा और संस्कृति अस्वीकृति अधिनियम' सहित तीन कानूनों के आधार पर लोगों को सख्ती से नियंत्रित करते हैं और उन्हें कठोर दंड देते हैं।
अधिकारी ने कहा, मंत्रालय की ओर से प्रकाशित 2024 की उत्तर कोरियाई मानवााधिकार रिपोर्ट में दक्षिण कोरियाई नाटक देखने के लिए मृत्युदंड के मामलों को भी दर्ज किया गया है।
उत्तर कोरिया का 'प्रतिक्रियावादी विचारधारा और संस्कृति अस्वीकृति अधिनियम' दिसंबर 2020 में अधिनियमित किया गया था। यह कानून दक्षिण कोरिया की मीडिया सामग्री को वितरित करने वालों के लिए मौत की सजा और दर्शकों के लिए 15 साल तक की जेल का प्रावधान करता है। इसके अलावा, यह कानून दक्षिण कोरिया की किताबों, गीतों और तस्वीरों को भी निशाना बनाता है। इस कानून के तहत दक्षिण कोरिया के भाषण या उनकी गायन शैलियों का इस्तेमाल करने के लिए दो साल तक के जबरन श्रम का भी प्रावधान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने अपनी सीमा के भीतर दक्षिण कोरिया की संस्कृति के प्रसार को रोकने के लिए उत्तर कोरिया के अधिकारियों ने करीब 17 साल की उम्र के करीब 30 नाबालिगों को आजीवन कारावास और मौत की सजा सुनाई। इस साल की शुरुआत में दक्षिण कोरियाई नाटक देखने के लिए एक 16 वर्षीय लड़के को 12 साल की जबरन मजदूरी की सजा सुनाई गई थी।