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Nirav Modi Extradition: नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता साफ, ब्रिटेन की कोर्ट ने खारिज की भगोड़े की याचिका

Wed, 09 Nov 2022 10:25 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

नीरव मोदी ने पीएनबी से करीब 7000 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। जिसके बाद वह विदेश भाग गया था। फिलहाल वह लंदन की एक जेल में है। भारत सरकार उसे वापस लाने की हर संभव कोशिश कर रही है।
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नीरव मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में भगोड़े हीरा कारोबारी ने अपने प्रत्यर्पण को रोकने के लिए अपील की थी। उसकी तमाम दलीलों के बाद भी ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि नीरव का प्रत्यर्पण किसी भी नजरिए से अन्यायपूर्ण या दमनकारी नहीं होगा। । गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में वेस्टमिंस्टर जज ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश सुनाया था। हालांकि बाद में उसे इस फैसले के खिलाफ अपील करने की मंजूरी दी गई थी।  

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लंदन की हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि नीरव के आत्महत्या करने का जोखिम ऐसा नहीं है कि उसे धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित करना अनुचित और दमनकारी होगा। जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और न्यायाधीश रॉबर्ट जे ने अपने फैसले में कहा कि जिला न्यायाधीश सैम गूजी की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत का पिछले साल प्रत्यर्पण के पक्ष में दिया गया आदेश सही था। न्यायाधीश जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और न्यायाधीश रॉबर्ट जे ने इस साल की शुरुआत में रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में नीरव की अपीलों पर सुनवाई की अध्यक्षता की थी।

भगोड़े हीरा कारोबारी (51) के पास ब्रिटेन और यूरोप की अदालतों में आगे अपील दाखिल करने का विकल्प है और भारत में मुकदमे के लिए उसे वापस लाने की प्रक्रिया बहुत तेज होने की संभावना नहीं लगती। फैसले में इस बात को भी स्वीकार किया गया है कि भारत सरकार अपने आश्वासनों को उचित गंभीरता से लेगी। इस तथ्य से भी यह बात पुष्ट होती है कि यह नामचीन मामला है इसलिए 51 वर्षीय नीरव को हर समय कड़ी सुरक्षा मिलनी चाहिए जो मार्च 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से दक्षिण-पश्चिम लंदन में वैंड्सवर्थ जेल में बंद है।
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भारत लंबे समय से नीरव मोदी को भारत लाने की कोशिशों में लगा है। लेकिन ब्रिटेन की जेल में बंद नीरव मोदी अपने प्रत्यर्पण को रोकने के लिए अलग-अलग दलीलें दे रहा है। ब्रिटेन में उसके वकीलों ने दलील दी थी भगोड़ा आर्थिक अपराधी डिप्रेशन का शिकार है। वह भारत की जेलों में आत्महत्या कर सकता है। ये तर्क देकर उन्होंने नीरव मोदी को भारत भेजने का विरोध किया था। हालांकि ब्रिटेन की अदालन ने पूरी सुनवाई के बाद उसकी याचिका खारिज कर दी। 

इससे पहले मामले में सुनवाई के दौरान भी जस्टिस रॉबर्ट जे ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत के ब्रिटेन के साथ अच्छे संबंध हैं। ऐसे में ब्रिटेन को 1992 की भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि का सम्मान करना जरूरी है।  

मनोरोग विशेषज्ञों की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई: सीबीआई
इस बीच सीबीआई ने कहा कि लंदन की कोर्ट में नीरव मोदी मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान दो मनोरोग विशेषज्ञों की गवाही मोदी की खराब मनोवैज्ञानिक स्थिति के तर्क को खारिज करने में महत्वपूर्ण साबित हुई। इसके चलते फैसला भारत के पक्ष में आया। सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि अंतिम सुनवाई के दौरान विशेषज्ञों-कार्डिफ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंड्रयू फॉरेस्टर और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सीना फजल ने हाईकोर्ट के समक्ष सबूत पेश किए।

विशेष पीएमएलए कोर्ट ने घोषित किया था आर्थिक अपराधी
इससे पहले विशेष पीएमएलए कोर्ट द्वारा दिसंबर 2019 में भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के अनुसार नीरव मोदी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। जिसके बाद वह लंदन भाग गया था। तीन साल पहले नीरव मोदी को ब्रिटेन की स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने 13 मार्च 2019 को लंदन से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह साउथ वेस्ट लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में कैद है। 

नीरव मोदी पर 7000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
बता दें कि नीरव मोदी ने पीएनबी से करीब 7000 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। जिसके बाद वह विदेश भाग गया था। फिलहाल वह लंदन की एक जेल में है। भारत सरकार उसे वापस लाने की हर संभव कोशिश कर रही है।  नीरव मोदी ने 2017 में अपनी कंपनी फायरस्टार डायमंड के जरिए प्रतिष्ठित रिदम हाउस बिल्डिंग खरीदी थी। उसका प्लान इसे हेरिटेज प्रॉपर्टी में बदलने का था। माना जाता है कि उसने ज्यादातर संपत्तियां पीएनबी घोटाले से हासिल रकम से खरीदी थी।

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