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UK: 1970-80 के दशक में ब्रिटिश भारतीयों ने नस्लवादी हमलों का कैसे किया सामना, नई डॉक्यूमेंट्री में हुआ खुलासा

Sat, 06 Apr 2024 05:32 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

UK: डॉक्यूमेंट्री में अर्काइव फुटेज और प्रत्यक्ष प्रमाणों का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया गया है कि कैसे ब्रिटिश भारतीयों ने नेशनल फ्रंट जैसे समूहों के नस्लवादी हमलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 
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ब्रिटिश भारतीय। - फोटो : रोगन प्रोडक्शंस
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विस्तार
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ब्रिटेन की एक नई डॉक्यूमेंट्री में 1970-80 के दशक में ब्रिटिश भारतीयों द्वारा सामना किए गए कष्टदायी अनुभवों पर प्रकाश डाला गया है। डॉक्यूमेंट्री में आत्मरक्षा के लिए कारों में हॉकी स्टिक ले जाने और पेट्रोल बम जमा करने के वृत्तांतों का जिक्र किया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री को तीन भागों में चैनल-4 पर प्रसारित किया गया। 

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डॉक्यूमेंट्री सीरीज को 'डिफियेंस: फाइटिंग द फार राइट' शीर्षक दिया गया है। इसमें 1976 से 1981 के बीच बर्बर नस्लवादी हमलों और हत्याओं की सिलसिलेवार घटनाओं के खिलाफ दक्षिण एशियाई समुदाय के संघर्ष को दिखाया गया है। डॉक्यूमेंट्री में अर्काइव फुटेज और प्रत्यक्ष प्रमाणों का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया गया है कि कैसे ब्रिटिश भारतीयों ने नेशनल फ्रंट जैसे समूहों के नस्लवादी हमलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 

ब्रिटिश भारतीय - फोटो : रोगन प्रोडक्शंस
इस डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन ब्रिटिश पंजाबी राजेश थिंड ने किया है। राजेश पश्चिम लंदन में नस्लवादी हमलों और हत्याओं की घटनाओं के बीच बड़े हुए। वह बताते हैं, लुधियाना में जन्मे मेरे पिता हमेशा अपनी कार की बूट में हॉकी स्टिक लेकर चलते थे और अपने दैनिक व्यवसाय के चलते दूर-दराज के इलाकों में बदमाशों से टकराते थे। राजेश बताते हैं, 1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में मैंने उन घटनाओं को देखा। तब मैं बच्चा था। तब से मैं इन कहानियों को बताना चाहता था कि कैसे हम ब्रिटिश एशियाई लोगों ने नेशनल फ्रंट और और अन्य नस्लवादी, फासीवादी संगठनों का सामना किया। 

वह कहते हैं, मैं दुनिया को यह दिखाना चाहता हूं कि कैसे हमारे दक्षिण एशियाई समुदाय के लोग साहसी और साधन संपन्न थे। हमारे लोग भारत और अफ्रीका दोनों में उपनिवेश विरोधी संघर्षों के दशकों के अनुभव से प्रेरित थे। 
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इस डॉक्यूमेंट्री का प्रोडक्शन ब्रिटिश फिल्म पुरस्कार विजेता रोगन प्रोडक्शंस, लेफ्ट हैंडेड फिल्म्स और ग्रुप एम मोशन एंटरटेनमेंट ने किया है। यह डॉक्यूमेंट्री दक्षिण एशियाई इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं की पड़ताल करती है। इसमें साउथहॉल का विरोध प्रदर्शन, ब्रिक लेन की लड़ाई और ब्रैडफोर्ड 12 की घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं को अक्सर मुख्यधारा की मीडिया के द्वारा नजरअंदाज किया जाता है। 
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