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नेपाल त्रासदी: हाथों में अपनों की तस्वीर, आंखों में उम्मीद; प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई तबाही की दर्दनाक कहानी

Thu, 27 Aug 2026 11:04 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों से उनके अपने छीन लिए। कहीं पति और चार बच्चों को खोने वाला पिता अस्पताल में जिंदगी काट रहा है, तो कहीं लोग हाथों में तस्वीरें लेकर अपनों को खोज रहे हैं। किसी ने कहा, कुछ भी नहीं बचा, तो किसी ने बताया कि बाजार और बस्तियां आंखों के सामने बह गईं। उस सुबह ऐसा क्या हुआ कि पूरा इलाका उजड़ गया? आइए, प्रत्यक्षिर्शियों की दर्दनाक कहानी को विस्तार जानते हैं...
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नेपाल त्रासदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को ऐसा उजाड़ दिया कि पीछे सिर्फ मलबा और अपनों की तलाश करते परिवार रह गए। दिए गए विवरण के अनुसार, बाढ़ में मरने वालों की संख्या 350 के पार पहुंच गई है और 900 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन समेत कई जिलों में घर, सड़क, पुल और दूसरी जरूरी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस तबाही के बीच प्रत्यक्षदर्शियों की बातें दर्द की पूरी तस्वीर सामने रखती हैं।

गिरी लाल की कहानी क्या बताती है?

रसुवा जिले के तिमुरे में रहने वाले 38 वर्षीय गिरी लाल ने इस बाढ़ में अपनी पत्नी, दो बेटों और दो बेटियों को खो दिया। वह खुद घायल हैं और काठमांडू के सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। परिवार चलाने के लिए स्थानीय कचरा प्रबंधन कार्यालय का वाहन चलाने वाले गिरी लाल अब अस्पताल में उन यादों के साथ हैं, जिन्हें वह चाहकर भी पीछे नहीं छोड़ सकते। उनके लिए बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पूरा परिवार उजड़ जाने का दर्द बन गई है।

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तस्वीरें लेकर अस्पताल के बाहर क्यों भटक रहे हैं परिवार?

भरतपुर अस्पताल में लिपा सापकोटा अपने लापता भाई साबी की तस्वीर लेकर लोगों से पूछती रहीं कि क्या किसी ने उन्हें देखा है। साबी बुधवार सुबह तिब्बत से नेपाल लौटते समय लापता हुए। लिपा ने बताया कि कुछ शव मिले हैं, लेकिन उनकी हालत ऐसी थी कि पहचान करना आसान नहीं था। उधर नुवाकोट के त्रिशूली में भी परिवार साइनिक मैदान पहुंचे और बचाव दलों को अपने लापता परिजनों की जानकारी दी। एक व्यक्ति ने बताया कि उसके पिता जलविद्युत परियोजना में काम करते थे और ड्यूटी के दौरान लापता हो गए।

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'कुछ भी नहीं बचा', बाढ़ से बचकर निकले व्यक्ति ने क्या देखा?

रसुवा से बचाए गए एक व्यक्ति ने तबाही का वर्णन करते हुए कहा कि वहां अब कुछ भी नहीं बचा और उसने अपना सब कुछ खो दिया। उसके माता-पिता भी लापता हैं। त्रिशूली की एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि उसने अपने जीवन में ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी। बाढ़ आने पर लोग घर छोड़कर ऊंची जगहों की ओर भागे। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, जहां कभी घर, सरकारी कार्यालय, बाजार और खेत थे, वहां अब सब कुछ बह चुका है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सुबह करीब 8:40 बजे नाश्ता करते समय उसे खबर मिली कि तिमुरे पूरी तरह तबाह हो गया है। उसे लगा जैसे भूकंप आ गया हो।

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लापता लोगों को खोजने में पुलिस और सेना कैसे जुटी है?

लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट और चितवन में अभियान चला रही हैं। पुलिस परिवारों से फोन नंबर, आखिरी लोकेशन और दूसरी जानकारी जुटा रही है। पुलिस अधिकारी एके छेत्री के अनुसार, जिन लोगों का पता नहीं चल पा रहा है, उन्हें खोजने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है। दिए गए विवरण के अनुसार, दोपहर तक करीब 200 लापता मामलों का पता लगाया जा चुका था। इनमें जिंदा मिले लोग और मृत पाए गए लोग दोनों शामिल थे। इस बीच, काठमांडू से भी कई अधिकारी अपने लापता साथियों की रिपोर्ट दर्ज कराने प्रभावित इलाकों में पहुंचे हैं।

तबाही का असर भारतीयों पर कितना पड़ा?

नेपाल की इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। दिए गए ताजा विवरण के अनुसार, 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। बाढ़ के बाद भारतीयों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की जानकारी जुटाने के प्रयास जारी हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके अपने कहां हैं। राहत और बचाव दल मलबे, तेज बहाव और मुश्किल पहाड़ी परिस्थितियों के बीच तलाश जारी रखे हुए हैं। नेपाल में कई परिवार अब भी इसी उम्मीद और डर के बीच हैं कि शायद उनका अपना जिंदा मिल जाए, लेकिन अगली खबर कुछ और न हो।

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