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ईरान युद्ध का यूरोप पर असर: अमेरिकी पैट्रियट मिसाइलों का भंडार गंभीर संकट में, रूस का खतरा कितना बड़ा?

Thu, 27 Aug 2026 09:46 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

ईरान युद्ध के बीच यूरोप में अमेरिकी पैट्रियट मिसाइलों का भंडार गंभीर रूप से घट गया है और इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व भेजा गया है। इससे नाटो देशों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। रूस से तत्काल हमले का खतरा नहीं है, लेकिन वर्ष 2030 तक उसकी सैन्य क्षमता को लेकर आशंका जताई गई है। सवाल है कि मिसाइलों की कमी के बीच यूरोप संभावित रूसी हमले से खुद को कैसे बचाएगा?

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ईरान युद्ध - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी सेना के सामने यूरोप में उन्नत मिसाइल रोधी हथियारों की कमी गंभीर स्तर तक पहुंच गई है। खास चिंता पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर को लेकर है। बताया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध के कारण यूरोप में रखे अमेरिकी मिसाइल भंडार का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व भेजा गया है। इससे नाटो देशों की संभावित रूसी मिसाइल हमले से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यूरोप में पैट्रियट मिसाइलों की कमी कितनी गंभीर?

अमेरिकी रक्षा अधिकारी के अनुसार, यूरोप में अमेरिकी सेना के पास किसी संभावित लंबे समय तक चलने वाले बैलिस्टिक मिसाइल हमले को रोकने के लिए पर्याप्त पैट्रियट मिसाइल नहीं हैं। एक अकेली बैलिस्टिक मिसाइल या रास्ता भटककर आने वाली रूसी मिसाइल के खिलाफ भी बचाव की क्षमता बहुत सीमित बताई गई है। नाटो के एक अधिकारी ने भी यूरोप में अमेरिकी और नाटो बलों के पास पैट्रियट मिसाइलों का भंडार कम होने की पुष्टि की है।

ईरान युद्ध ने मिसाइल भंडार पर इतना दबाव कैसे बढ़ाया?

अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इनमें पैट्रियट मिसाइलें भी शामिल हैं। यूरोप में मौजूद अमेरिकी मिसाइल भंडार का कुछ हिस्सा मध्य पूर्व भेजे जाने से वहां उपलब्ध हथियारों की संख्या और घट गई। इस संघर्ष में कुछ अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की भी जानकारी दी गई है।

रूस से हमले का खतरा अभी कितना?

रूस की ओर से नाटो देशों पर तत्काल बैलिस्टिक मिसाइल हमला होने की आशंका नहीं बताई गई है। हालांकि, यूरोपीय और नाटो अधिकारियों का आकलन है कि रूस वर्ष 2030 तक गठबंधन के देशों पर हमला करने की स्थिति में हो सकता है। इसी बीच सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ इस सप्ताह मॉस्को गए और कथित तौर पर रूस को हमला न करने की चेतावनी दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस यात्रा को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

यूक्रेन की स्थिति से यूरोप की चिंता क्यों जुड़ी?

पैट्रियट मिसाइलों की कमी का सबसे गंभीर असर यूक्रेन में दिखाई दे रहा है। यूक्रेन लंबे समय से अधिक हवाई रक्षा सहायता की मांग कर रहा है। पहले अमेरिका की ओर से यूक्रेन को भेजे गए पैट्रियट सिस्टम और मिसाइलों से भी अमेरिकी भंडार कम हुआ है। यूक्रेन का कहना है कि रूस की उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में अमेरिकी पैट्रियट ही सबसे प्रभावी हैं और हाल के हमलों में ऐसी कई मिसाइलें यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था को भेदने में सफल रही हैं।

क्या 2030 तक पैट्रियट भंडार सुधरने की उम्मीद?

अमेरिकी और नाटो अधिकारियों के अनुसार, पैट्रियट मिसाइलों का भंडार वर्ष 2030 तक दोबारा मजबूत होने का अनुमान है। तब तक रूस की यूक्रेन में जारी जंग भी उसकी यूरोप के खिलाफ किसी बड़े मिसाइल अभियान की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। एक साथ दो मोर्चों पर हवाई युद्ध करना मॉस्को के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इसके बावजूद मौजूदा कमी ने नाटो देशों की हवाई सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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