4. जल और मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, उस क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में भारी बारिश नहीं हुई थी। इसलिए यह बाढ़ तात्कालिक वर्षा से ज्यादा भूस्खलन के चलते नदी के ब्लॉक होने और फटने के कारण ही आई।
5. इस घटना के बाद बूढ़ी गंडकी के साथ-साथ निचले तटीय क्षेत्रों, जैसे- त्रिशूली नदी गलियारा, बेनीघाट, मुग्लिन, चितवन और नवलपरासी तक अचानक बाढ़ का भारी खतरा पैदा हो गया और प्रशासन को चेतावनी जारी करनी पड़ी।
कैसे-कितनी तेजी से नेपाल में आगे बढ़ी बाढ़?
- बूढ़ी गंडकी नदी के तटीय गलियारे में मलबा गिरने के बाद जब बहाव अचानक सिर्दिबास, लोकपा, न्याक्चेत, जगत बगर, घट्टेखोला, सल्लेरी, यारुबगर, माछाखोला, सोती और आरुघाट तक पहुंच गई। इसका असर आगे त्रिशूली नदी गलियारे- बेनीघाट, मुग्लिन से लेकर चितवन और नवलपरासी जिलों तक फैला।
- सरकार के मुताबिक, ऊपरी हिमालय (पहाड़ी हिस्से) से निचले इलाकों, जैसे आरुघाट तक पहुंचने में बाढ़ के सैलाब को लगभग 3 से 4 घंटे लगे। पहाड़ी ढलान बहुत सीधा होने के कारण काला कीचड़, मलबा और पानी अत्यधिक तीव्र रफ्तार से बढ़ा; हिलोमाटो उछलकर ऊंचे पेड़ों की टहनियों तक जा पहुंचा।
- आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख धर्मराज उप्रेती के मुताबिक, आरुघाट में स्थित नदी का जलस्तर मापने वाले केंद्र पर खतरे का निशान पांच मीटर है, लेकिन बाढ़ का पानी 8.3 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। इस बीच जब-जब भूस्खलन से फंसी हुई नदी का पानी अचानक छूटता, इसका सैलाब करीब 15 मीटर ऊपर तक उठ जा रहा था।
नेपाल में बूढ़ी गंडक में आई बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
जलविद्युत परियोजनाएं: बाढ़ से चार जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है।
- निर्माणाधीन 341 मेगावाट बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना का मुख्य निर्माण कैंप और मशीनें बह गईं।
- 24.5 मेगावाट दोभान खोला परियोजना का कैंप और बेली ब्रिज बह गया।
- 30.59 मेगावाट यारु खोला परियोजना का बेलीब्रिज और उपकरण/सामग्री बह गई।
- 16 मेगावाट माछा खोला परियोजना की सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हो गए।
राहत-बचाव कार्य कैसे चल रहा है, अब तक कितने रेस्क्यू किए गए?
1. अब तक कितने रेस्क्यू हुए
- नेपाल के आपदा विभाग के मुताबिक, अब तक कुल 47 लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। नेपाली सेना के हेलिकॉप्टरों ने कई अलग-अलग स्थानों से लोगों को निकाला है।
- जगत गांव के भूस्खलन-संभावित क्षेत्र से छह लोग का हवाई रेस्क्यू किया गया। इसके अलावा न्याकफेदी से नौ लोग। यारुबगर क्षेत्र में रास्तों के कट जाने से बीच में फंसे हाइड्रोपावर कर्मियों, स्थानीय लोगों, एक शिशु और एक विदेशी नागरिक को सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा पैयुं गांव से 12 लोग बचाए गए।
2. सुरक्षा बलों और संसाधनों की तैनाती
- खोज और बचाव के लिए कुल 387 सुरक्षाकर्मियों की संयुक्त टीम तैनात की गई है। इनमें नेपाली सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल की तैनाती की गई।
- नेपाली सेना के चार हेलीकॉप्टर लगातार हवाई सर्वेक्षण, फंसे लोगों को रेस्क्यू करने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
3. तकनीकी निरीक्षण और बेली ब्रिज की तैयारी
आपदा प्रबंधन विभाग और सड़क विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम ड्रोन कैमरों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है। यह टीम बाढ़ के सटीक कारणों का पता लगाने के साथ-साथ आरुघाट में क्षतिग्रस्त हुए मुख्य पुल के स्थान पर तुरंत बेली ब्रिज स्थापित करने की संभावना का अध्ययन कर रही है, ताकि संपर्क मार्ग बहाल किया जा सके।
4. तटीय निवासियों व पर्यटकों की स्थिति
- बाढ़ के खतरे को देखते हुए आरुघाट बाजार और निचले तटीय क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों और जंगलों की तरफ स्थानांतरित किया गया है।
- मनास्लु मार्ग पर पुल टूटने के कारण फंसे पर्यटकों, जगत में करीब 115 और लोकपा में 40 पर्यटक अपने-अपने होटलों और सुरक्षित स्थानों पर बने हुए हैं।