उत्तर कोरिया की नई हाइपरसोनिक मिसाइल की क्षमताओं को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को नई मिसाइल का परीक्षण करने का दावा किया था। दक्षिण कोरिया ने उसी दिन इस दावे की पुष्टि कर दी थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिसाइल को हाइपरसोनिक नहीं कहा जा सकता। ये मिसाइल उतनी दूरी तक भी नहीं गई, जिससे इसे अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने में सक्षम माना जाए।
दक्षिण कोरियाई सेना के प्रमुख ने कहा है कि 11 जनवरी को दागी गई मिसाइल की क्षमता उस मिसाइल से बेहतर थी, जिसका उत्तर कोरिया ने छह दिन पहले परीक्षण किया था। पांच जनवरी को दागी गई मिसाइल को उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मिसाइल बताया था। लेकिन तब उसके दावे पर दक्षिण कोरिया ने शक जताया था। अब दक्षिण कोरिया की सेना ने पुष्टि कर दी है कि उत्तर कोरिया हाइपरसोनिक मिसाइल दागने में सक्षम हो गया है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें अति तेज रफ्तार से हमला करने में सक्षम होती हैं। ये ध्वनि से पांच गुना ज्यादा रफ्तार हासिल करने में सक्षम होती हैं। ये बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइल हो सकती हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें उन तमाम मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेद सकती हैं, जो अभी दुनिया में मौजूद हैं।
उत्तर कोरिया के पांच जनवरी के मिसाइल परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में बैठक हुई थी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की चिंताओं से उत्तर कोरिया के इरादे पर पहले भी कोई फर्क नहीं पड़ा है। 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके बावजूद उत्तर कोरिया ने आधुनिक हथियारों का विकास जारी रखा है।
दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों की राय है कि उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का मकसद अब तक खुद को अमेरिकी हमलों से बचाना रहा है। लेकिन भविष्य उसके इन कार्यक्रमों से पास-पड़ोस के देशों की रक्षा के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैँ।