अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बाड़ लगाने के सवाल पर पहले सख्त तेवर दिखाने के बाद पाकिस्तान ने फिर क्यों अपना रुख नरम कर लिया, यह अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के बीच कयास का विषय बना हुआ है। पांच जनवरी को पाकिस्तान की सेना के जनसंपर्क विभाग- इंटरसर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तिकार ने दो टूक एलान किया था कि बाड़ लगाने का काम किसी कीमत पर नहीं रोका जाएगा। उन्होंने कहा था- ‘बाड़ लगाने के काम में पाकिस्तान के सैनिक शहीद हुए हैं और उनकी शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा।’ लेकिन शुक्रवार को पाकिस्तान का नया रूप सामने आया।
पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद ने कहा कि सरहद पर बाड़ लगाने के बचे काम को पड़ोसी देश की सहमति से पूरा किया जाएगा। राशिद ने कहा- ‘वे हमारे भाई हैं।’ अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच सीमा को डूरंड लाइन कहा जाता है। अफगान तालिबान इस सरहद को मान्यता नहीं देता। इसलिए बीते अगस्त में काबुल पर कब्जा करने के बाद से उसने बाड़ लगाने के काम पर एतराज शुरू कर दिया। पिछले महीने एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तालिबान लड़ाके जबरन बाड़ लगाने का काम रोकते और इस काम के लिए लाई गई सामग्रियों को जब्त करते देखे गए। उस वीडियो में उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को आगे बाड़ न लगाने की चेतावनी दी थी। उसके बाद ही आईएसपीआर के महानिदेशक का सख्त बयान आया था।
पिछले महीने काम रोकने का वीडियो वायरल होने के बाद हाल में एक और वीडियो ट्विटर पर आया। उसमें अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख्वार्जमी यह कहते सुने गए कि पाकिस्तान को बाड़ लगा कर सीमा पर विभाजन खड़ा करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा- ऐसा कानून के खिलाफ और अनुचित है।