नासा की ट्विनस स्टडी से पता चला है कि मानव शरीर अंतरिक्ष के वातावरण में कैसी प्रतिक्रिया करता है। इस ऐतिहासिक अध्ययन से प्राप्त डाटा से वैज्ञानिक यह समझने में कामयाब रहे हैं कि मानव शरीर अंतरिक्ष में किस तरह से अनुकूल रह सकता है और वहां के कठोर वातावरण से उसे सही सलामत वापस लाया जा सकता है या नहीं। बता दें कि ट्विनस स्टडी 2015-16 में हुई थी।
नासा ने बताया कि यह डाटा पहला एकीकृत बायोमोलेक्यूलर दृश्य प्रदान करता है कि मानव शरीर की अंतरिक्ष में क्या प्रतिक्रिया होती है। डाटा चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मानव अभियान के दौरान मिशन में शामिल लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए बेहतर तरीके से जीनोमिक स्टेपिंग स्टोन के रूप में कार्य करेगा। जर्नल साइंस में प्रकाशित ट्विन्स स्टडी के प्रमुख परिणामों में जीन में बदलाव, प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया और टेलोमेर डायनेमिक्स से संबंधित निष्कर्ष शामिल हैं। डाटा के मुताबिक, अंतरिक्ष में रहने के दौरान टूटे हुए क्रोमोसोम खुद को पुन: व्यवस्थित करते हैं।
जुड़वा भाइयों को किया था शामिल
इस अध्ययन में जुड़वा भाइयों को शामिल किया गया था। अध्ययन इसलिए किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि अंतरिक्ष में जाने से हमारे जीन पर क्या परिवर्तन हो सकते हैं। प्रयोग करने के लिए मार्क पृथ्वी पर रहे जबकि स्कॉट कैली आईएसएस पर थे। परीक्षण अवधि के दौरान दोनों पर बारीकी से निगरानी रखी गई। इसमें परिणाम पता चले कि माइक्रोग्रैविटी एक व्यक्ति को कैसे प्रभावित करती है। एक साल की अवधि के दौरान जैविक नमूने मार्क और स्कॉट दोनों से लिए गए थे।