नोबेल पुरस्कार विजेता व म्यांमार की जन नेता आंग सान सू की को चार साल के लिए जेल की सजा सुनाई गई है। सोमवार को म्यांमार की एक अदालत ने सू की को सेना के खिलाफ असंतोष भड़काने और कोविड नियमों के उल्लंघन के मामले में उन्हें सजा सुनाई।
सैन्य तख्तापलट ने उनकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी की सरकार को अपना पांच साल का दूसरा कार्यकाल शुरू करने से रोक दिया था। उनके विरुद्ध एक अन्य मामले में फैसला अगले सप्ताह आ सकता है। अगर वह सभी मामलों में दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें 100 साल से अधिक की जेल की सजा हो सकती है। कानूनी अधिकारी ने कहा कि अदालत ने सोमवार को यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सू की को इनके लिए जेल भेजा जाएगा या उन्हें नजरबंद रखा जाएगा।
लोकतंत्र के लिए अपने लंबे संघर्ष में, उन्होंने 1989 से शुरू करते हुए अब तक 15 साल तक नजरबंदी में बिताए हैं। लोगों को उकसाने का मामला, पार्टी के फेसबुक पेज पर पोस्ट बयान से जुड़ा हुआ है। जबकि कोरोना वायरस प्रतिबंध उल्लंघन का आरोप पिछले साल नवंबर में चुनाव से पहले एक अभियान में उनकी मौजूदगी से जुड़ा था।
कई मामलों में हैं आरोपी
आंग सान सू की के खिलाफ म्यांमार में कई मुकदमे चल रहे हैं। उन पर भ्रष्टाचार, मतदान में धांधली का भी आरोप लगाया गया है। फिलहाल सेना ने उन्हें दो मामलों में दोषी ठहराया है। सैन्य शासन के खिलाफ आवाज उठाने वालों में आंग सान सू की बड़े नेताओं में से एक हैं। यही कारण है कि म्यांमार के अंदर उनकी लोकप्रियता आज भी बरकार है।
प्रदर्शनकारियों पर चढ़ाया सैन्य ट्रक, 3 के मरने की आशंका
सैन्य शासित म्यांमार के सबसे बड़े शहर यंगून में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सेना का एक वाहन लोगों पर चढ़ा दिया गया। इस घटना में कम से कम तीन लोगों की मौत होने की आशंका है।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रदर्शन के एक आयोजक ने बताया कि रविवार का यह मार्च यंगून में आयोजित कम से कम तीन प्रदर्शनों में से एक था। देश की पूर्व नेता आंग सान सू की के खिलाफ लगभग एक दर्जन आपराधिक मामलों में से एक में अपेक्षित फैसले से एक दिन पहले देश के अन्य हिस्सों में इसी तरह की रैलियां आयोजित किए गए थे। इस दौरान सेना ने सड़क पर बेसुध पड़े पीड़ितों को भी गिरफ्तार कर लिया।