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Myanmar: सैन्य सरकार देगी आम लोगों को बंदूक का लाइसेंस, अच्छे चरित्र का व्यक्ति होना जरूरी

Tue, 14 Feb 2023 04:33 AM IST
वीरेंद्र शर्मा पीटीआई, बैंकाॅक

सार

म्यांमार सरकार ने देश के प्रति वफादार नागरिकों को ही लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति दी है। अच्छे नैतिक चरित्र के अलावा नगारिक राज्य की सुरक्षा में गड़बड़ी में शामिल नहीं होना चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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म्यांमार में जल्द ही आम नागरिक भी लाइसेंसी हथियार रख सकेंगे। देश की सैन्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों, रिटायर्ड सैन्य कर्मियों और आमलोगों को लाइसेंसी हथियार देना का फैसला लिया है। 
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मीडिया रिपोर्ट्रस के मुताबिक, म्यांमार सरकार ने देश के प्रति वफादार नागरिकों को ही लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति दी है। अच्छे नैतिक चरित्र के अलावा नगारिक राज्य की सुरक्षा में गड़बड़ी में शामिल नहीं होना चाहिए।  साथ ही  लाइसेंस लेने वाले की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। साथ ही अभी यह भी स्पष्ट नहीं है क यह कानून कब प्रभावी होगा। सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल जॉ मिन तुन ने बीबीसी बर्मी-भाषा सेवा को नीति की पुष्टि करते हुए कहा कि इसे जारी करने की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ लोग सैन्य-विरोधी समूहों द्वारा हमलों से बचाने के लिए हथियार की मांग कर रहे थे। 

1988 में लोगों के लिए बंदूक लाइसेंस देना किया गया था बंद 
1988 में बड़े पैमाने पर असफल लोकतंत्र समर्थक विद्रोह के बाद सेना ने नागरिकों के लिए बंदूक लाइसेंस रद्द कर दिया था। लोग नई नीति के तहत 9 एमएम पिस्टल और .38 कैलिबर समेत शॉटगन एवं एयर गन के हथियारों के लिए लाइसेंस ले सकते हैं। 
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देश में बिगड़े आर्थिक हालात 
म्यांमार की सेना ने एक फरवरी 2021 को नई सरकार बनाने जा रहे निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को हिरासत में लेकर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। उसके बाद से गंभीर होती गई आर्थिक स्थितियों के बीच देश के लोगों को असाधारण महंगाई और जरूरी चीजों के अभाव का सामना करना पड़ा है। इस बीच कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपना कारोबार समेट कर म्यांमार से बाहर चली गई हैं। रिसर्च संस्था टोरिनो वर्ल्ड अफेयर्स इंस्टीट्यूट की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2021 से दिसंबर 2022 के बीच 28 बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने या तो देश में अपना कारोबार पूरी तरह बंद कर दिया या उसे स्थगित कर रखा है।  

400 कंपनियां चल रही थी कारोबार
 तख्ता पलट के पहले जापान की लगभग 400 कंपनियां म्यांमार में कारोबार चला रही थीं। भारत के भी म्यांमार से गहरे कारोबारी और अन्य संबंध रहे हैं। एशिया टाइम्स में छपे विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि भारत ने कुछ समय पहले म्यांमार में चुनाव कराने की हुई घोषणा का स्वागत किया था। लेकिन अब अगर सैनिक शासकों ने अपना यह वादा नहीं निभाया, तो चुनाव की उम्मीद लगाए सभी पक्षों को निराशा होगी। इससे म्यांमार की अंदरूनी स्थिति और बदतर हो जाएगी।
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