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गाजा से एक मां की चिट्ठी: दर्द, मुश्किलों और उम्मीद की अनूठी गाथा; पढ़कर आप अपने आंसू नहीं रोक पाएंगे

Wed, 09 Oct 2024 03:56 PM IST
अभिषेक दीक्षित यूएन हिंदी समाचार

सार

खान यूनिस शहर के एक फील्ड अस्पताल के जिन स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका प्रसव करवाने में मदद की थी, उनका धन्यवाद करते हुए उन्होंने एक पत्र में लिखा कि रॉकेट और बमों की आवाज मेरी खुशियों पर भारी पड़ रही थी, लेकिन मैंने ठान ली थी कि अपने बच्चे के साथ मैं हर मुश्किल से निपट लूंगी। चाहे कुछ हो जाए, हमें इससे बचना ही है।
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गाजा के हालात - फोटो : UN
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विस्तार
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यह कहानी युद्ध के पहले दिन से शुरू नहीं हुई। यह आरम्भ हुई नौ महीने पहले उस दिन से, जब मुझे मालूम हुआ कि मैं मां बनने वाली हूं। वो नवम्बर 2023 का कोई दिन था, जब गाजा में युद्ध आरम्भ हुए लगभग एक महीना हो चुका था। अला'आ, गाजा पट्टी की उन अनुमानित 1 लाख 55 हजार गर्भवती महिलाओं व नई माताओं में से एक हैं, जिन्हें पिछले साल 2023 में गोलीबारी के बीच बमबारी से बचकर भागते हुए तम्बुओं में किसी भी प्रकार की चिकित्सा सुविधा, दवाओं या स्वच्छ पानी के बिना अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।  

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खान यूनिस शहर के एक फील्ड अस्पताल के जिन स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका प्रसव करवाने में मदद की थी, उनका धन्यवाद करते हुए उन्होंने एक पत्र में लिखा कि रॉकेट और बमों की आवाज मेरी खुशियों पर भारी पड़ रही थी, लेकिन मैंने ठान ली थी कि अपने बच्चे के साथ मैं हर मुश्किल से निपट लूंगी। चाहे कुछ हो जाए, हमें इससे बचना ही है।

संकटपूर्ण स्थिति
गाजा में गर्भवती महिलाओं के लिए स्थिति भयावह है। थकान व भूख से कमजोर वहां स्वास्थ्य सेवाओं का नामो-निशान लगभग मिट चुका है। कोई भी अस्पताल पूरी तरह से चालू नहीं है, इससे उनके पास देखभाल और इलाज के लिए बहुत कम विकल्प बचे हैं। चिकित्सा सुविधाओं पर सैकड़ों हमले हुए हैं, और फिलहाल 36 में से केवल 17 अस्पताल ही आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की भी गम्भीर कमी है, स्वास्थ्य कर्मी मारे जा रहे हैं या भागने के लिए मजबूर हैं। जो बचे हैं वो ऐसे समय के लिए काफ़ी नहीं हैं, जब गाजा की पूरी आबादी चोटों, बीमारियों व रोगों में वृद्धि का सामना कर रही है। इसमें 25 से ज्यादा वर्षों में पहली बार सामने आया पोलियो का मामला भी शामिल है।
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विस्थापन से उपजे जोखिम
गाजा की 5 लाख से अधिक महिलाएँ, प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल, परिवार नियोजन और संक्रमण के उपचार जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं से महरूम हैं। इनमें 17,000 से अधिक गर्भवती महिलाएं, अकाल के कगार पर हैं। अला'आ ने अपने पत्र में आगे लिखा है, 'सात महीने बीते थे कि मुझे अपना घर छोड़कर एक तम्बू में रहने के लिए जाना पड़ा। मुझे यह सोचकर बहुत रोना आता था कि मेरा बहादुर बच्चा अपने उस कमरे की दीवारें कभी नहीं देख पाएगा, जिसे तैयार करने का सपना मैंने हमेशा देखा था।'

उनकी पीड़ा यहीं खत्म नहीं हुई, क्योंकि जल्दी ही उन्हें वहां से भी निकाल दिया गया। अला'आ ने लिखा, 'मैं इस अहसास से दिल की गहराई से रो रही थी कि मुझे अपने बच्चे को घर से बाहर जन्म देना पड़ेगा। मैं 50 दिन बाद, बमबारी के बीच, आग से बचने के लिए चिल्लाती, रोती हुई भागी। उस पल, मुझे डर लगा कि कहीं मैं अपना बच्चा न खो दूं।'

वर्तमान में गाजा में लगभग 19 लाख लोग विस्थापित हैं, जिनमें से बहुत से लोग साल 2023 में अनगिनत बार, एक जगह से दूसरी जगह भागने के लिए मजबूर हुए हैं। युद्ध शुरू होने के समय से गर्भपात, प्रसूति सम्बन्धी जटिलताएं, जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म जैसी समस्याओं की दरें खतरनाक रूप से बढ़ी हैं। इनका प्रमुख कारण रहा, तनाव, कुपोषण और मातृत्व देखभाल की कमी।

अला'आ ने बमबारी से बचकर भागने वाले क्षण को याद करते हुए लिखा है, 'हम वहां थे, शून्य से शुरू करने को मजबूर- कोई आश्रय नहीं, कोई घर नहीं, यहां तक कि कोई भविष्य भी नहीं। हमने दोबारा एक तम्बू बनाया और एक-दूसरे से एक बार फिर यह वादा किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, हमें जीवित रहना होगा। दो हफ्ते बाद मुझे थोड़ा दर्द महसूस हुआ। यह प्रसव पीड़ा थी! (मैंने सोचा) नहीं, अभी बहुत जल्दी है, मैं अपने बच्चे को घर पर जन्म देना चाहती हूं।'

अला'आ, चार दिनों तक प्रसव पीड़ा जारी रहने पर, UK-Med द्वारा संचालित खान यूनिस के एक फील्ड अस्पताल गईं। यह एक मानवीय गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जिसमें ब्रिटेन एवं यौन व प्रजनन के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNFPA द्वारा समर्थित एक विशेष स्वास्थ्य एवं प्रसूति इकाई है।

उन्होंने आगे बताया, 'मैं यहां जांच के लिए आई थी और सब कुछ सही नजर आया। दाई और नर्सें दयालु व स्नेही थीं। मैंने डॉक्टर हैलेन से बात की और उन्होंने मुझे वहीं आकर बच्चे को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित किया।' जब प्रसव का समय आया, तो उन सभी ने सुनिश्चित किया कि अला'आ, सुरक्षित तरीके से अपने बच्चे को जन्म दे सकें। 'मैं रात 2 बजे सीधे अस्पताल आ गई। सभी दाइयां तैयार मिलीं, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि प्राकृतिक तरीके से जन्म देने में जोखिम हो सकता है।'

UNFPA अस्पताल की प्रसूति इकाई को प्रजनन स्वास्थ्य किट व अन्य आपूर्तियां प्रदान करता है। साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि स्वास्थ्यकर्मी प्रसूति से जुड़ी आपात स्थितियों समेत समस्त जटिल परिस्थितियों में व्यापक देखभाल प्रदान कर सकें। अला’आ और उनका नवजात शिशु मोहम्मद, युद्ध और साफ पानी, भोजन एवं सुरक्षा की कमी के बावजूद अब एकदम स्वस्थ हैं।

उन्होंने लिखा, 'बच्चे को जन्म देने के लिए यहां आना उत्कृष्ट फैसला था। मुझे अच्छा लगता है कि इतने दबाव में होने के बावजूद, ये लोग हर समय मुस्कुराते रहते हैं. यह टीम बहुत महान है।

निशाने पर स्वास्थ्य देखभाल
गाजा में जारी युद्ध का, महिलाओं और लड़कियों पर प्रभाव चौंका देने वाला है। 5 लाख से अधिक महिलाएं, प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल, परिवार नियोजन और संक्रमण के इलाज जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं से वंचित हैं। 17,000 से अधिक गर्भवती महिलाएँ भुखमरी की स्थिति में जी रही हैं। UNFPA और उसके सहयोगी, प्रजनन स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने, जीवन रक्षक दवाएं, चिकित्सा उपकरण और आपूर्ति वितरित करने तथा आधिकारिक एवं अस्थाई शिविरों में दाइयों व स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की टीमों को तैनात करके, स्वास्थ्य देखभाल मुहैया करवाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।

इसके अलावा किसी भी स्थान पर, माताओं और उनके नवजात शिशुओं को आपातकालीन प्रसूति देखभाल प्रदान करने के लिए फील्ड अस्पतालों में, छह मोबाइल मातृ स्वास्थ्य इकाइयां भी स्थापित की गई हैं, लेकिन युद्धविराम, स्वास्थ्य सेवाओं तक पूर्ण पहुँच और निरन्तर वित्त पोषण के अभाव में, सहायता जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। 

अला’आ ने, तमाम कठिनाइयों के बावजूद, उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए लिखा है, 'मेरे बेटे मोहम्मद की ओर से, आपकी हर मदद के लिए शुक्रिया। हम आपके आभारी हैं। मुझे उम्मीद है कि बेहतर हालात में हमारी दोबारा मुलाकात होगी।'
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(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
 

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