बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए वैज्ञानिक अब प्राचीन इन्सानों के दांतों में मिले बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके एंटीबायोटिक दवा बनाने जा रहे हैं। इसके लिए वो प्राचीन निएंडरथल मानवों के दांत से बैक्टीरिया निकालेंगे।
ये बैक्टीरिया उस समय के इन्सानों के दांत में बने गड्डे में छिपे थे। इस एंटीबायोटिक से कई पुरानी और नई बीमारियों से इन्सानों को बचा सकता है। वैज्ञानिक निएंडरथल मानव के दांत में छिपे बैक्टीरिया की मदद से एंटीबायोटिक बनाने जा रहे हैं।
साइंस जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बैक्टीरिया दांत में बने गड्ढों में छिपे हैं। सूक्ष्म जीव हमारे ओरल माइक्रोबायोम के अलग-अलग प्रकार का बड़ा हिस्सा होते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की बायोमॉलीक्यूलर आर्कियोलॉजिस्ट क्रिस्टीना वैरिनर ने कहा, आज के दौर में इन्सानों के मुंह में मिलने वाले बैक्टीरिया की प्राचीन दुनिया से एकदम अलग है। इसलिए प्राचीन बैक्टीरिया की मदद से बनने वाले एंटीबायोटिक से हम इन्सानों को कई तरह की बीमारियों से बचा सकते हैं।
दांतों में सबसे ज्यादा डीएनए की मात्रा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, शरीर में दांत ऐसी चीज है जो लंबे समय तक ठीक स्थिति में रहती है। यहीं पर डीएनए की सबसे ज्यादा मात्रा पाई जाती है। दांत के बेहद छोटे हिस्से से भी क्रिस्टीना करोड़ों डीएनए निकाल सकती हैं। ये डीएनए अलग-अलग प्रजातियों के सूक्ष्म जीवों के हो सकते हैं।