काबुल गुरुद्वारे हमले में अफगान सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। अफगान सुरक्षाबलों द्वारा एक विशेष अभियान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) के एक आतंकवादी मावलवी अब्दुल्ला उर्फ असलम फारूकी को गिरफ्तार किया गया है। फारूकी पर ही हमले की योजना बनाने का आरोप है। काबुल गुरुद्वारे पर 25 मार्च को हमला हुआ था।
लश्कर-ए-तैयबा समूह और फिर तहरीक-ए-तालिबान के आतंकी समूह से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक मावलवी अब्दुल्ला अप्रैल 2019 में मावलवी जिया-उल-हक उर्फ अबू उमर खोरासानी की जगह लेकर आईएसकेपी प्रमुख बना था।
गौरतलब हो कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मौजूद गुरुद्वारे में घुसकर 25 मार्च को भारी हथियारों से लैस एक आत्मघाती हमलावर ने गोलीबारी की थी। इस हमले में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई वहीं आठ लोग घयाल हुए थे। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। अफगान विशेष बलों ने हमलावार को मार गिराया था।
गौरतलब है कि सिख समुदाय यहां अल्पसंख्यक है। आंतरिक मंत्रालय ने एक बंदूकधारी द्वारा किए गए हमले पर एक ट्वीट में कहा था कि दुर्भाग्य से इस हमले में 25 नागरिक मारे गए और आठ अन्य घायल हो गए। गुरुद्वारे के अंदर फंसे 80 लोगों को सुरक्षा बलों ने बचा लिया। इससे पहले, अफगान मीडिया ने बताया था कि लगभग छह घंटे तक चले हमले को चार आतंकवादियों ने अंजाम दिया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि महिलाओं और बच्चों सहित 80 लोगों को गुरुद्वारे से बचाया गया है। आईएसआईएस आतंकवादी समूह ने एक बयान जारी कर पुष्टि की कि उसके सदस्यों ने काबुल शहर में सिखों पर हमले को अंजाम दिया।
वहीं, अफगानिस्तान के मुख्य आतंकवादी समूह तालिबान ने गुरुद्वारे पर हमले में अपनी भागीदारी से इनकार किया था। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा था कि आतंकवादी समूह का काबुल के शोर बाजार इलाके में हुए हमले से कोई संबंध नहीं है।
बता दें कि पिछले महीने की शुरुआत में इस्लामिक स्टेट से संबंधित एक संगठन ने काबुल में अल्पसंख्यक शिया मुस्लिमों के एक धार्मिक समागम पर हमला किया था जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई थी। इस रुढ़िवादी मुस्लिम बहुल देश में सिखों को बड़े पैमाने पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।