मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्म मुइज्जू
- फोटो : एक्स/डॉ. मोहम्मद मुइज्जू
भारत से तनातनी के बीच मालदीव की राजनीति में खींचतान जारी है। इन सबके बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू आज संसद बैठक में अपना पहला राष्ट्रपति भाषण देने वाले हैं। हालांकि, देश की दो मुख्य विपक्षी पार्टियों ने मोइज्जू के संसद में संबोधन में शामिल न होने का एलान कर दिया है। दरअसल, विपक्षी पार्टियों-मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) और डेमोक्रेट्स पार्टी ने मुइज्जू के संबोधन का बहिष्कार करने का फैसला किया है। दोनों पार्टियों ने मुइज्जू की भारत विरोधी विचारधारा की आलोचना की थी और अब मुइज्जू के भाषण का बॉयकॉट करने का फैसला किया है।
आखिर बहिष्कार का फैसला क्यों?
मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने अभी तक राष्ट्रपति के भाषण का बहिष्कार करने के उद्देश्य का खुलासा नहीं किया है। वहीं डेमोक्रेट्स ने कहा कि वे उन तीन मंत्रियों की फिर से नियुक्ति के कारण बैठक से दूर रहेंगे, जिन्हें संसद ने खारिज कर दिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति अपना भाषण सुबह नौ बजे देंगे।
भारत के साथ इसलिए आई खटास
बता दें, हाल में भारतीय सैनिकों को माले से बाहर निकालने के मोइज्जू के फैसले के कारण भारत और मालदीव के रिश्तों में खटास आई है। इसी को लेकर विपक्षी पार्टियां मोइज्जू का विरोध कर रही हैं।
सुबह नौ बजे संबोधित करेंगे मोइज्जू
संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को वर्ष के पहले कार्यकाल के पहले सत्र में संसद को संबोधित करना होता है और इस दौरान देश की स्थिति की रूपरेखा तैयार करना और सुधार लाने के लिए अपनी सिफारिशों को रेखांकित करना जरूरी होता है। विपक्ष ने मुइज्जू सरकार की आलोचना की थी। पिछले महीने हुए एक राजनयिक विवाद के बीच दोनों विपक्षी दलों ने भारत को देश का 'सबसे पुराना सहयोगी' बताया था और मौजूदा प्रशासन पर भारत विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया था।
सरकार की विदेश नीति पर सवाल
एमडीपी और डेमोक्रेट्स ने हाल ही में एक संयुक्त बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने वर्तमान सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए थे। दोनों दलों ने कहा था, 'एमडीपी और डेमोक्रेट दोनों का मानना है कि किसी भी विकास के भागीदार और विशेष रूप से देश के सबसे पुराने सहयोगी को अलग करना देश के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद हानिकारक होगा। देश की सरकार को सभी के विकास के उद्देश्य के साथ काम करनी चाहिए।' विपक्ष ने जोर दिया कि मालदीव की स्थिरता और सुरक्षा के लिए हिंद महासागर में स्थिरता और सुरक्षा महत्वपूर्ण है।