पाकिस्तान की एक इस्लामी सलाहकार समिति ने सरकार से कहा है कि तीन तलाक या तुरंत तलाक की प्रथा को पाकिस्तान में भी दंडनीय अपराध माना जाना चाहिए और इसके लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है। भारत में तीन तलाक की प्रथा को दंडनीय अपराध बनाने के कुछ हफ्ते बाद अब पाकिस्तान में भी इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है।
भारत में नए कानून के तहत तलाक-ए-बिद्दत गैर कानूनी और तुरंत तीन तलाक देने वाले को पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है। इसके अंतर्गत तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। यह संज्ञेय तभी होगा जब या तो खुद महिला शिकायत करे या फिर उसका कोई सगा-संबंधी।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पाकिस्तान की काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी ने सिफारिश की है कि तीन तलाक को इस्लामिक राष्ट्र में दंडनीय अपराध माना जाना चाहिए। समिति ने कहा कि इस्लाम में तलाक के कई तरीके हैं। इनमें एहसान, हसन और तलाक-ए-बिद्दत (तीन तलाक) शामिल हैं। एहसान और हसन से पीछे हटा जा सकता है। वहीं, तलाक-ए-बिद्दत से मुकरने की गुंजाइश नहीं है।
यानी एक बार पति पत्नी से तीन बार तलाक बोल देता है तो वह उससे पलट नहीं सकता है। इसलिए, नेशनल असेंबली संसद का निचला सदन, इस कार्रवाई को एक दंडनीय अपराध बनाने के लिए कानून बना सकता है।