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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में इस नेता की दावेदारी से चीन का एलजीबीटी समुदाय खुश

Shilpa Thakur
Updated Tue, 16 Apr 2019 04:05 PM IST
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पीट बूटएजएज - फोटो : social media

अमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की रेस में इस बार बहुत से नए चेहरे शामिल हैं। इन्हीं में से एक पीट बूटएजएज भी हैं। बूटएजएज ने अपने राष्ट्रपति अभियान के औपचारिक लॉन्च की घोषणा रविवार को की है। वह वर्तमान में इंडियाना के साउथ बेंड में मेयर हैं। अगर बूटएजएज को चुनवों में जीत मिलती है, तो अमेरिका के इतिहास में वह पहले 'गे' (समलैंगिक) राष्ट्रपति होंगे।

इस वक्त ना केवल अमेरिका बल्कि दुनियाभर के एलजीबीटी समुदाय की नजर उनपर है। इन देशों में चीन भी शामिल है। यहां का एलजीबीटी समुदाय बूटएजएज के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने को लेकर बेहद उत्साहित है। चीन में इस समुदाय के हालात ज्यादा ठीक नहीं हैं, यहां समुदाय को लोगों को काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। 

अमेरिका में कैसी है एलजीबीटी समुदाय की स्थिति?

अमेरिका में भी एलबीटी समुदाय के साथ सबकुछ ठीक नहीं है। यहां उनके साथ भेदभाव किया जाता है। अमेरिकी सेना में भी 1994 में शुरू हुई 'डोन्ट आस्क, डोन्ट टेल' की नीति फिर से शुरू हो गई है। ये नीति 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने खत्म कर दी थी। लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से शुरू कर दी है। नीति इसी शुक्रवार से दोबारा लागू हुई है। 



इसके तहत अमेरिकी सेना में अगर कोई भी सैनिक ये बोलता है कि वह समलैंगिक है, तो उसे अपनी नौकरी छोड़नी होगी। वहीं समलैंगिकों को सेना में भर्ती नहीं किया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई सैनिक समलैंगिक होते हुए भी, इलाज के लिए तैयार हो जाता हैं, तो उसे इसके लिए मदद दी जाएगी। और वह अपनी नौकरी जारी रख सकता है। 

2016 के अध्ययन में पता चला है कि अमेरिका में 10 हजार से भी अधिक सैनिक समलैंगिक हैं। 

अमेरिका में इस समुदाय के लोगों ने इस नियम को शर्मनाक बताया है। उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से भी आपत्ति है। जिसमें ट्रंप ने कहा है कि सेना में समलैंगिकों के होने से चिकित्सा लागत काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर बूटएजएज अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं, तो हो सकता है कि समुदाय पर लगी बंदिशें हट जाएं। उनके राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारी की बात सुनकर एलजीबीटी समुदाय के लोग बेहद खुश हैं। 

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पीट बूटएजएज - फोटो : social media
अमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की रेस में इस बार बहुत से नए चेहरे शामिल हैं। इन्हीं में से एक पीट बूटएजएज भी हैं। बूटएजएज ने अपने राष्ट्रपति अभियान के औपचारिक लॉन्च की घोषणा रविवार को की है। वह वर्तमान में इंडियाना के साउथ बेंड में मेयर हैं। अगर बूटएजएज को चुनवों में जीत मिलती है, तो अमेरिका के इतिहास में वह पहले 'गे' (समलैंगिक) राष्ट्रपति होंगे।

इस वक्त ना केवल अमेरिका बल्कि दुनियाभर के एलजीबीटी समुदाय की नजर उनपर है। इन देशों में चीन भी शामिल है। यहां का एलजीबीटी समुदाय बूटएजएज के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने को लेकर बेहद उत्साहित है। चीन में इस समुदाय के हालात ज्यादा ठीक नहीं हैं, यहां समुदाय को लोगों को काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। 

अमेरिका में कैसी है एलजीबीटी समुदाय की स्थिति?

अमेरिका में भी एलबीटी समुदाय के साथ सबकुछ ठीक नहीं है। यहां उनके साथ भेदभाव किया जाता है। अमेरिकी सेना में भी 1994 में शुरू हुई 'डोन्ट आस्क, डोन्ट टेल' की नीति फिर से शुरू हो गई है। ये नीति 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने खत्म कर दी थी। लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से शुरू कर दी है। नीति इसी शुक्रवार से दोबारा लागू हुई है। 

इसके तहत अमेरिकी सेना में अगर कोई भी सैनिक ये बोलता है कि वह समलैंगिक है, तो उसे अपनी नौकरी छोड़नी होगी। वहीं समलैंगिकों को सेना में भर्ती नहीं किया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई सैनिक समलैंगिक होते हुए भी, इलाज के लिए तैयार हो जाता हैं, तो उसे इसके लिए मदद दी जाएगी। और वह अपनी नौकरी जारी रख सकता है। 

2016 के अध्ययन में पता चला है कि अमेरिका में 10 हजार से भी अधिक सैनिक समलैंगिक हैं। 

अमेरिका में इस समुदाय के लोगों ने इस नियम को शर्मनाक बताया है। उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से भी आपत्ति है। जिसमें ट्रंप ने कहा है कि सेना में समलैंगिकों के होने से चिकित्सा लागत काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर बूटएजएज अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं, तो हो सकता है कि समुदाय पर लगी बंदिशें हट जाएं। उनके राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारी की बात सुनकर एलजीबीटी समुदाय के लोग बेहद खुश हैं। 

पीट बूटएजएज अपने पति कास्टेन ग्लेजमैन के साथ - फोटो : PTI

चीन में बूटएजएज के बारे में क्या सोचते हैं लोग?

चीन में बूटएजएज को लेकर मीडिया अधिक कवरेज नहीं कर रहा है। लेकिन यहां एलजीबीटी समुदाय डेमोक्रोटिक पार्टी के इस नेता के राष्ट्रपति बनने को लेकर काफी उत्साहित हैं। बीते हफ्तों से ना केवल अमेरिका बल्कि दुनियाभर में बूटएजएज चर्चा में बने हुए हैं।

चीन में 'बीजिंग जेंडर हेल्थ एजुकेशन' चलाने वाले शिआओगांग वी बूटएजएज के बारे में कहते हैं, "मुझे पता है वो 37 साल के हैं, जो अमेरिका में युवा मेयर हैं, अफगानिस्तान युद्ध के हीरो और हार्वर्ड से ग्रेजुएट हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि किसी समलैंगिक नेता का वैश्विक तौर पर ऐसे सामने आना अच्छी खबर है। लेकिन अमेरिका में समलैंगिक व्यक्ति का राष्ट्रपति बनना, पूरी दुनिया का ध्यान खींचता है। जो दुनियाभर में एलजीबीटी समुदाय के लिए सकारात्मक विकास है।

चीन में क्या हैं बंदिशें?

वैसे तो चीन में समलैंगिकता अपराध नहीं है, साल 2001 में अधिकारियों ने इसे औपचारिक मानसिक रोगों की सूची से भी हटा दिया था। लेकिन हाल के सालों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने इस समुदाय पर कई तरह की रोक लगाई हैं। 

समलैंगिक रिश्तों का प्रसारण टेलीवीजन और ऑनलाइन माध्यमों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। हाल ही में रिलीज एक बायोपिक से चीनी दर्शकों के लिए समलैंगिक लोगों के कुछ सीन और 'गे' शब्द को हटा दिया गया है। 

क्या कहते हैं अमेरिकी?

पीट बूटएजएज के अमेरिकी राष्ट्रपति की रेस में शामिल होने के बाद से यहां मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही हैं। अमेरिका में कुछ लोगों का कहना है कि देश को चलाने के लिए लिंग नहीं बल्कि क्षमता चाहिए। जो कि बूटएजएज में है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि वह समलैंगिक हैं और ठीक से काम नहीं कर पाएंगे।

बूटएजएज की बात करें तो उन्होंने लोगों से कुछ नहीं छिपाया है। उन्होंने हाई स्कूल शिक्षक कास्टेन ग्लेजमैन के साथ शादी की है। उन्होंने अपना संघर्ष, अपनी शादी और अपनी पहचान खुलकर जाहिर की है। अगर शी जैसे राष्ट्रपति उनसे मुलाकात करेंगे तो जाहिर है, काफी कुछ नया होगा। बूटएजएज का कहना है कि वह किसी एक समूह के लिए नहीं बल्कि सबसे लिए राष्ट्रपति बनना चाहते हैं।

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