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अमेरिका: अब सपना बनने लगा अपना घर खरीदना, जानें क्या है बढ़ते दामों की वजह

Mon, 12 Apr 2021 10:29 PM IST
कुमार संभव अमर उजाला ब्यूरो, वाशिंगटन

सार

  • रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबार पर नजर रखने वाली एजंसी रेडफिन के मुताबिक, जिन मकानों को बिक्री के लिए लिस्ट किया जाता है, वे औसतन हफ्ते भर में बिक जाते हैं। इस कारण कीमतें तेजी से चढ़ी हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका में अपना मकान अब आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है, जिसकी वजह बढ़ते दाम बताए जा रहे हैं। दरअसल, अमेरिका में हाल के दिनों में रियल एस्टेट में काफी इजाफा हुआ है। कई जानकारों ने संपत्ति के दामों में आ रही तेजी को कृत्रिम करार दिया है। इसकी तुलना 2007-08 के हाउसिंग बबल से की जा रही है, जिससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में मंदी आ गई थी। दरअसल, उस दौरान काफी लोगों ने मकान खरीदने के लिए कर्ज लिया, लेकिन उसे चुका नहीं पाए। ऐसे में बैंक कर्जदार हो गए और उसका असर बीमा कंपनियों पर पड़ा। इसके बाद पूरी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे मंदी के जाल में फंस गई। 

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रियल एस्टेट कारोबारियों के राष्ट्रीय संघ के प्रमुख अर्थशास्त्री लॉरेन्स युन ने बढ़ती कीमतों को कृत्रिम मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मकानों की सप्लाई पूरी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। इस संस्था के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय बिक्री के लिए देश में सिर्फ 10 लाख 30 हजार मकान मौजूद हैं, जबकि 2007 के हाउजिंग बबल के दौरान 40 लाख मकान बिक्री के लिए उपलब्ध थे। इस संस्था की वेबसाइट रियलटॉर.कॉम के मुताबिक, बीते हफ्ते बिक्री के लिए उपलब्ध मकानों की संख्या में 54 फीसदी की गिरावट आई, जिससे मकानों की राष्ट्रीय औसत कीमत में 17.2 फीसदी का इजाफा हो गया।

रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबार पर नजर रखने वाली एजंसी रेडफिन के मुताबिक, जिन मकानों को बिक्री के लिए लिस्ट किया जाता है, वे औसतन हफ्ते भर में बिक जाते हैं। इस कारण कीमतें तेजी से चढ़ी हैं। टेक्सास राज्य के शहर ऑस्टिन में भी पिछले एक साल के दौरान मकानों की कीमत में 40 फीसदी तक बढ़ गई। 
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बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, मकानों की कीमतें अचानक बढ़ने की कई वजहें हैं। इनमें सस्ते ऋण की उपलब्धता, कोरोना महामारी के समय मकानों का कम निर्माण, वर्क फ्रॉम होम का कल्चर बन जाने के कारण अधिक स्थान वाले मकान खरीदने का लोगों में आया रुझान शामिल है। इसके अलावा शेयर बाजार में भारी उछाल भी इसका बड़ा कारण है। दरअसल, जिन लोगों ने शेयर बाजार में पैसे लगाए, उनकी संपत्ति अचानक काफी बढ़ गई। ऐसे में ये लोग अब आसानी से सीधे डाउन पेमेंट करके मकान खरीदने में सक्षम हो गए।

इसके अलावा कई बड़ी कंपनियां अब मकान खरीदकर उन्हें किराए पर उठाने के धंधे में शामिल हो गई हैं। इसमें उन्हें ज्यादा फायदा दिख रहा है। मकानों की किल्लत की यह भी एक वजह मानी जा रही है। मकानों की कमी के कारण लॉटरी से मकान मिलने की प्रथा चलन में आ गई है। जानकारों के मुताबिक, इससे साधारण खरीदारों के लिए जोखिम बढ़ गया। लॉटरी की वजह से काफी खरीदारों को ऐसे मकान मिल रहे हैं, जो उनकी पसंद के मुताबिक नहीं होते। ऐसे में काफी लोगों को अपने मनमुताबिक घर तैयार करने में हजारों डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।

लॉरेन्स युन ने चेतावनी दी है कि अगर अर्थव्यवस्था में सुधार होता है तो लोगों को नई नौकरियां मिलेंगी, जिससे मकानों की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। यह इजाफा इतना ज्यादा हो सकता है कि मध्यमवर्गीय व्यक्ति के लिए मकान खरीदना संभव ही न रहे। गौरतलब है कि बढ़ते दामों के साथ मकानों का किराया भी बढ़ता है। हालांकि, अभी इसमें ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन महामारी के बाद हालात सामान्य होने पर ऐसा होने की पूरी आशंका है।

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