परमाणु निरस्त्रीकरण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता असफल होने के बाद अब उत्तर कोरिया ने कड़ा रुख अपनाने का फैसला लिया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लेते हुए कहा, वाशिंगटन की वजह से उनके देश को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है। इस बयान के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
सरकारी मीडिया ने बुधवार को किम को सफेद घोड़े पर ‘माउंट पाइकेतो’ जाते दिखाया। कोरियाई प्रायद्वीप की इस सबसे ऊंची चोटी को उत्तर कोरियाई लोग पवित्र मानते हैं। किम महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले अक्सर यहां आते हैं।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के साथ कूटनीतिक संबंध शुरू करने से पहले 2018 में भी किम चोटी पर गए थे। इतना ही नहीं, 2013 में अपने शक्तिशाली चाचा की फांसी से संबंधित फैसला लेने से पहले भी वह माउंट पाइकेतो गए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि किम के दिमाग में इस वक्त अमेरिका को लेकर अलग रणनीति चल रही है।
गुस्से का इजहार किया
किम जोंग ने निकटवर्ती निर्माणाधीन स्थलों का दौरा भी किया और परमाणु हथियार कार्यक्रम की वजह से उनके देश पर लगे प्रतिबंधों की आलोचना की। न्यूज एजेंसी ‘केसीएनए’ ने किम के हवाले से कहा कि अमेरिकी नेतृत्व वाले शत्रुतापूर्ण बलों ने कोरियाई लोगों पर जो दुख बरपाया है, वह उनके गुस्से में बदल गया है। उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता इस महीने की शुरुआत में बेनतीजा रही थी।