उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने मॉस्को पहुंचे हैं। यहां दौरे पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। पिछले चार सालों में यह किम जोंग उन की पहली रूस यात्रा है। रूस दौरे पर किम जोंग उन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों के रणनितिक महत्व को प्रदर्शित करता है। रूस के यूक्रेन से जारी युद्ध के बीच किम जोंग-उन की यह यात्रा उत्तर कोरिया और इसकी कम्युनिस्ट वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (डब्ल्यूपीके) के संबंधों के रणनीतिक महत्व को प्राथमिकता देने के लिए है।
रूस की यात्रा के दौरान किम ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए मॉस्को का समर्थन जारी रखने की बात दोहराई। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि रूस बुरी ताकतों को दंडित करने की लड़ाई में विजयी होगा। वह हमेशा रूस के साथ खड़े रहेंगे।
उन्होंने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए आधिपत्यवादी ताकतों के खिलाफ खड़े होने के लिए रूस की प्रशंसा की। उन्होंने अमेरिका और पश्चिम का नाम लिए बिना कहा कि उन्होंने रूस द्वारा प्रतिक्रिया में किए जाने वाले सभी कार्यों के लिए पूर्ण और बिना शर्त समर्थन व्यक्त किया है। उत्तर कोरियाई नेता ने कहा कि दोनों नेताओं ने कोरियाई प्रायद्वीप और यूरोप के राजनीतिक और सैन्य परिदृश्य पर गहन चर्चा की।
दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि देश उत्तर कोरिया के साथ कुछ सैन्य सहयोग पर विचार और चर्चा कर रहा है। जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि क्या रूस उत्तर कोरिया को अपने उपग्रह और रॉकेट लॉन्च करने में मदद करेगा, तो पुतिन ने जवाब दियाकि बिल्कुल यही कारण है कि हम यहां आए हैं।
दोनों देशों के बीच हथियारों को लेकर होगा समझौता?
गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले सप्ताह ही खुफिया जानकारी दी थी कि पुतिन और किम जोंग जल्द ही हथियार सौदे पर पूर्वी रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में मुलाकात करने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर कोरिया रूस को यूक्रेन युद्ध में हथियार सप्लाई कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि बीते साल भी उत्तर कोरिया ने रूस को मिसाइल और रॉकेट की सप्लाई की थी। वैगनर ग्रुप ने इसी हथियार का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया था। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई सोइगु ने भी बीते महीने उत्तर कोरिया का दौरा किया था।
कोविड-19 के बाद से किम जोंग उन का यह पहला विदेश दौरा है। मंगलवार की सुबह किम रूस के सीमावर्ती शहर खासन पहुंचे। वहां के ट्रेन स्टेशन पर मॉस्को और स्थानीय क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। रूस का सफj तय करने के लिए उन्होंने अपनी बख्तरबंद शाही ट्रेन का इस्तेमाल किया। एक रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी यह यात्रा डीपीआरके और रूस के बीच मित्रता और सहयोग संबंधों को उच्च स्तर पर ले जा सकती है।