वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका सरकार के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में किराये में वृद्धि एक साल पहले की तुलना में सिर्फ दो फीसदी दिखाई गई है। लेकिन एक प्राइवेट एजेंसी की वेबसाइट अपार्टमेंटलिस्ट.कॉम पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक ये वृद्धि 12 फीसदी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंकड़ों में ये अंतर लीज रिन्यू होने में हुई देर के कारण है। इसलिए सरकारी आंकड़ों में पुरानी लीज के आधार पर किराया दर्ज हुआ है। जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि आज अमेरिका उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में मकान किराये का हिस्सा 40 फीसदी हो गया है।
अमेरिकी राज्य फिलाडेल्फिया के सरकारी बैंक के ताजा सर्वे के मुताबिक 1970 के दशक के महा-मुद्रास्फीति दौर के बाद अब सबसे तेज गति से महंगाई बढ़ रही है। उत्पादन लागत से जुड़ी 80 फीसदी वस्तुओं की कीमत 1979 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले 20 साल तक चीन से सस्ती वस्तुओं के आयात के कारण अमेरिका अपने यहां महंगाई को काबू में रख पाया। लेकिन 2020 से आयात की गई चीजों की कीमत में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसका एक कारण चीन से मंगाई जाने वाली वस्तुओं पर बढ़ाया गया आयात शुल्क भी है। अमेरिका में हर साल चीन से 600 अरब डॉलर के उत्पादित वस्तुओं का आयात होता है।
इसी महंगाई की आड़ लेकर रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर जो मेंचिन राष्ट्रपति बाइडन के सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर के कारण मध्य वर्ग और कामकाजी वर्ग पर “महंगाई कर” लग गया है। 3.5 ट्रिलियन डॉलर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने का मतलब महंगाई को और बढ़ाना होगा। इसलिए उन्होंने दो टूक कहा है कि वे इस पैकेज का सीनेट में समर्थन नहीं करेंगे। ऐसा ही संकेत सीनेटर क्रिस्टीन सिनेमा ने भी दिया है। अगर ये सीनेटर अपनी बात कायम रहे, तो इस पैकेज का पास होना नामुमकिन हो जाएगा।