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अजीबोगरीब: सावधान! अब हर दिन एक बार हंसना होगा जरूरी, इस देश ने लागू किया नया कानून, अगर नहीं माना तो...

Fri, 12 Jul 2024 10:10 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो

सार

यामागाटा प्रांत में एक स्थानीय सरकार ने एक कानून लागू किया है, जिसमें निवासियों को बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हर दिन कम से कम एक बार हंसने के लिए कहा गया है।
 
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हर दिन हंसना होगा जरूरी - फोटो : Hira Mokariya
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विस्तार
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आप लोगों को सुबह-सुबह पार्कों में जोर-जोर से हंसते हुए देखते होंगे, तो आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती होगी। ऐसे ही कभी कोई शख्स आपको देखकर मुस्करा दे तब भी आपका दिन बन जाता होगा। हंसी को स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा माना जाता है।मगर आपको हंसने के लिए मजबूर किया जाए तो आप क्या करेंगे। दरअसल, एक देश में बड़ा ही अजीबोगरीब नियम लागू किया गया है। इसके अनुसार, नागरिकों को दिन में कम से कम एक बार जरूर हंसना होगा।

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जापान के यामागाटा प्रांत में एक स्थानीय सरकार ने एक कानून लागू किया है, जिसमें निवासियों को बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हर दिन कम से कम एक बार हंसने के लिए कहा गया है।

यह नियम सुझाव
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, राज्य में यह कानून पिछले सप्ताह लागू किया गया था। यह एक स्थानीय विश्वविद्यालय के शोध पर आधारित है। इसमें सुझाव दिया गया था कि नियमित तौर पर हंसने से दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है और लंबा जीवन जीने में मदद मिलती है। नए कानून के तहत लोगों को रोज कम से कम एक बार हंसना होगा।
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इसके अलावा, इसमें यह भी कहा गया है कि कारोबारी ऐसा माहौल तैयार करें जो हंसी- खुशी से भरा हो। हर महीने की आठ तारीख को लाफ्टर डे मनाया जाएगा। 

152 लोगों पर शोध
बता दें कि जिस शोध के आधार पर यह कानून लाया गया है, उसे यामागाटा यूनिवर्सिटी ने साल 2019 में अंजाम दिया था। इसमें पता चला था कि जो लोग सप्ताह में कम से कम एक बार हंसते हैं उनमें कार्डियोवैस्क्युलर समस्याएं होने की संभावना कम होती हैं। शोधकर्ताओं ने इसके अध्ययन में 152 लोगों को शामिल किया गया था। इनकी उम्र 17 से 40 साल थी। उल्लेखनीय है कि इसमें मुस्कुराने को या चुपचाप हंसने को हंसी के तौर पर नहीं रखा गया है। बता दें कि भारतीय योग में भी हंसने को कई बीमारियों का इलाज बताया गया है।

विपक्षियों ने किया कानून का विरोध
यह कानून लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने पेश और पारित किया। विपक्षी नेताओं ने इस कानून को लेकर आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून मौलिक मानवाधिकारों का हनन करने वाला है। जापान कम्युनिस्ट पार्टी के टोरू सेकी ने कहा कि हंसना या न हंसना हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है जो संविधान उपलब्ध कराता है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह उन लोगों के साथ भेदभाव करता है, जो किसी बीमारी की वजह से हंस नहीं सकते। लेकिन, कुछ संविधान विशेषज्ञों ने इसका समर्थन किया है।

विपक्ष पर पलटवार
वहीं, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'कानून लोगों को हंसने के लिए मजबूर नहीं करता। हर इंसान को खुद तय करना है कि उसे यह नियम मानना है या नहीं।' स्थानीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नए नियम में किसी के लिए भी कोई सजा नहीं है। 

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