जापान में इस समय तेज गर्मी पड़ रही है। उमस से लोग बेहाल हैं। जापानी मीडिया में इस बात की चर्चा है कि 2018 में जापान में ऐसे ही मौसम के बीच जुलाई में तापमान 40 डिग्री से भी ऊपर चला गया था। तब गर्म हवाओं के कारण 130 से ज्यादा लोग मर गए थे, जबकि तकरीबन 54 हजार लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। 2019 में 75 हजार से ज्यादा लोगों को आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल की पनाह लेनी पड़ी थी। जुलाई 2020 में 112 लोगों की मौत गर्मी से हुई और 65 हजार लोग अस्पताल में भर्ती हुए।
अब मौसम फिर कुछ वैसा ही रूप ले रहा है। इस बार इसी मौसम के बीच एथलीटों को ओलंपिक खेलों में उतरना पड़ेगा। यहां के अखबार जापान टाइम्स में छपी एक खबर में ध्यान दिलाया गया है कि तोक्यो में जब पहली बार 1964 में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था, तब भी गर्मी को लेकर चिंता पैदा हुई थी। उस वर्ष इसी कारण ओलंपिक कार्यक्रम में बदलाव करते हुए उसकी तारीख अक्तूबर तक खिसका दी गई थी।
विश्लेषकों ने कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिछले 57 वर्षों में जापान का औसत तापमान पहले से ज्यादा हो गया है। जापान के पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक इस अवधि में जापान के वार्षिक औसत तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। 1964 में सिर्फ एक दिन ऐसा हुआ था, जब पारा 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर गया था। 2018 में ऐसे कुल 12 दिन रहे। 2019 और 2020 में भी 12-12 दिन तापमान 35 डिग्री से ज्यादा रहा। जापान के मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल जुलाई और अगस्त में गर्मी औसत से भी ज्यादा पड़ेगी।
तोक्यो ओलंपिक आयोजन समिति के सलाहकार माकोतो योकोहारी ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि उच्च तापमान और उमस खिलाड़ियों के लिए दुःस्वप्न साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा- ‘लू लगने का जहां तक सवाल है, तो समस्या सिर्फ अधिक तापमान नहीं, बल्कि उमस से भी होती है। अगर ये दोनों मौजूद रहे, तो कहा जा सकता है कि इस लिहाज से तोक्यो ओलंपिक्स इन खेलों के इतिहास में सबसे बुरा साबित होगा।’
तोक्यो में ज्यादा तापमान के अंदेशे को देखते हुए आयोजकों ने मैराथन और दूसरी दौड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन सापोरो शहर में कराने का फैसला किया है, जहां तापमान अकसर अपेक्षाकृत कम रहता है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि इन स्पर्धाओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी खुद को सौभाग्यशाली समझ सकते हैं, क्योंकि उनके जैसी सुविधा बाकी खेलों के एथलीटों को नहीं मिलेगी।
ब्रिटिश संस्था- सस्टेनेबल स्पोर्टस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिक गर्मी का मानव शरीर पर कई तरह का बुरा असर होता है। ज्यादा गर्मी का प्रभाव मांसपेशियों और हृदय की गतिविधि पर पड़ सकता है। अगर उसी समय उमस भी हो, तो खिलाड़ियों की मुसीबत और बढ़ जाती है। अत्यधिक गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक और शरीर के अंगों के फेल होने जैसी समस्याएं और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।