विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विदेश मंत्री एस जयशंकर द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने के उद्देश्य से आज से नेपाल की दो दिवसीय यात्रा करेंगे। इस दौरान वह नेपाल के विदेश मंत्री एनपी सऊद के साथ भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। काठमांडू में चार और पांच जनवरी को होने वाली नेपाल-भारत संयुक्त आयोग की बैठक में दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि 2024 में उनकी यह पहली विदेश यात्रा हैं।
नेपाल ने बैठक को लेकर जारी की प्रेस विज्ञप्ति
नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, दोनों नेता नेपाल-भारत संयुक्त आयोग में अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अमृत बहादुर राय ने कहा कि संयुक्त आयोग की बैठक के दौरान नेपाल-भारत संबंधों के संपूर्ण पहलू की समीक्षा की जाएगी। अमृत बहादुर राय ने कहा कि ऊर्जा, व्यापार, बुनियादी ढांचे का विकास, बढ़ते व्यापार घाटे पर नेपाल की चिंता समेत कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
1987 में हुई थी भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की स्थापना
नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में अमृत बहादुर राय ने कहा कि यह द्विपक्षीय बैठक नेपाल-भारत संबंधों को मजबूत करने और साझेदारी पर केंद्रित होगी। गौरतलब हैं कि भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की स्थापना 1987 में की गई थी। यह दोनों पक्षों को द्विपक्षीय साझेदारी के सभी पहलुओं की समीक्षा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। नेपाल विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' से शिष्टाचार मुलाकात करेंगे।
बता दें नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत नेपाल भारत का प्रमुख भागीदार है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, विदेश मंत्री की यात्रा दो करीबी और मैत्रीपूर्ण पड़ोसियों के बीच उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की परंपरा को ध्यान में रखते हुए है। दोनों देशों के नेताओं ने अक्सर सदियों पुराने "रोटी बेटी" रिश्ते पर ध्यान दिया है। नेपाल पांच भारतीय राज्यों - सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 1,850 किमी से अधिक लंबी सीमा साझा करता है।