एनजीओ के जरिए नेपाल के अंदरूनी मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के मामला और गरमा गया है। मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से मदद लेने के मसले पर ये सवाल पहले से गरम था। एक ताजा विवाद ने इसे और भड़का दिया है।
बीते हफ्ते कलांकी-महाराजगंज मार्ग पर बन रहे रिंग रोड को विकलांगों, साइकिल सवारियों और पैदल चलने वाले लोगों के लिए सुविधाजनक बनाने की मांग के समर्थन में एक नागरिक अभियान शुरू किया गया। इस सिलसिले में शनिवार को एक ‘नागरिक मार्च’ निकाला गया। उसमें शामिल लोग जो बैनर लेकर चल रहे थे, उनमें एक यूएसएड का भी था। यूएसएड अमेरिका सरकार के धन से चलने वाली एजेंसी है, जो विभिन्न देशों में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को वित्तीय मदद देती है।
पूर्व वित्त सचिव ने किया ट्वीट
नेपाल में रिंग रोड को चौड़ा करने की परियोजना चीन की मदद से चलाई जा रही है। एक चीन समर्थित योजना के मामले में अमेरिकी एजेंसी के सहयोग से नागरिक अभियान शुरू करने को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। यूएसएड के बैनर का मामला उठने पर नेपाल के पूर्व वित्त सचिव रामकिशोर खनाल ने ट्विटर पर लिखा- ‘अगर आप किसी को किसी कार्यक्रम में आमंत्रित कर रहे हैं, तो पहले आपको यह पता कर लेना चाहिए उसे पैसा कहां से मिला है। वरना, मुश्किल खड़ी होगी ही।’
खनाल के ट्विट का जवाब देते हुए पत्रकार कनक मणि दीक्षित ने लिखा- ‘अगर आमंत्रण अच्छे मकसद के लिए है, तो हमें बिना किसी से पूछे उसमें भाग लेना चाहिए। अगर बाद में यह पता चले भी कि किसी ने उस कार्यक्रम के लिए पैसा दिया था, तो हमें डरने या पछतावा करने की जरूरत नहीं है। हमें सिर्फ मकसद पर ध्यान रखना चाहिए।’
ये विवाद भड़कने के बाद यूएसएड ने एक ट्विट कर नागरिक अभियान से किसी भी प्रकार के संबंध का खंडन किया। उसने कहा कि उसकी सहयोगी संस्था फेज नेपाल विकलांग लोगों की मदद के लिए स्वतंत्र रूप से काम करती है। लेकिन नागरिक मार्च के लिए यूएसएड को आमंत्रित नहीं किया गया था। इस अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि उसके बैनर का अभियान में अनुचित रूप से इस्तेमाल किया गया, जिसकी वह जांच कर रही है।
अमेरिका-चीन के बीच फंसा नेपाल
लेकिन इस विवाद से उन पर्यवेक्षकों की आशंका मजबूत हुई है कि नेपाल अमेरिका और चीन की प्रतिद्वंद्विता के बीच उलझता जा रहा है। इस सिलसिले मे अमेरिकी संस्था एमसीसी से 50 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता का मसला विवादित हुआ है। कम्युनिस्ट पार्टियां इस मदद का विरोध कर रही हैं, जबकि बताया जाता है कि सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस ये सहायता लेने के पक्ष में है। एमसीसी से मदद लेने का प्रस्ताव अब तक संसद से पास नहीं हो पाया है।
इस बीच चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट के तहत नेपाल में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं बन रही हैं। इस बारे में अमेरिकी अधिकारियों ने कई बार कहा है कि ये परियोजनाएं नेपाल के हित में नहीं, बल्कि चीन के फायदे में हैं। उधर चीन ने कहा है कि अगर नेपाल एमसीसी की मदद लेता है, तो इस पर उसे कोई एतराज नहीं है। इसके बावजूद नेपाली जनमत का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी सहायता लेने के खिलाफ है।