इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष के बीच अमेरिका और इस्राइल गाजा पट्टी के भविष्य पर मंथन कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्राइल और आतंकी संगठन- हमास के बीच युद्ध में अब तक 9000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। लगभग 20 लाख की आबादी वाले इलाके- गाजा पट्टी में इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) की आक्रामक कार्रवाई के बाद अब पुनर्वास के तरीकों पर विचार हो रहा है।
मीडिया की खबरों के मुताबिक अमेरिका और इस्राइल गाजा पट्टी के भविष्य के लिए विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। जिन विकल्पों पर विचार हो रहा है, इनमें हमास के सत्ता से बाहर होने पर अमेरिकी सैनिकों को गाजा पट्टी में तैनात करने के साथ-साथ एक बहुराष्ट्रीय सेना की संभावना भी शामिल है। जिन अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है उनमें मिस्र-इस्राइल शांति संधि और अस्थायी संयुक्त राष्ट्र निगरानी की देखरेख करने वाली एक शांति सेना शामिल है।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि गाजा में सेना भेजने पर फिलहाल विचार नहीं किया जा रहा है। बातचीत अभी भी प्रारंभिक चरण में है, और यह स्पष्ट नहीं है कि अरब देश इस्राइल हमास संकट से निपटने में भाग लेने में रुचि लेंगे या नहीं।
किन विकल्पों पर हो रहा है मंथन
इस मामले से परिचित लोगों ने कहा कि गाजा पट्टी में इस्राइली सेना जमीनी आक्रमण शुरू कर चुकी है। ऐसे में गाजा के भविष्य के लिए तत्काल एक योजना तैयार करने की भावना से बातचीत शुरू की गई है। दूसरा विकल्प 1979 की मिस्र-इस्राइल शांति संधि की देखरेख करने वाली शांति सेना की स्थापना करना होगा, जबकि तीसरे विकल्प में गाजा को अस्थायी रूप से संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में रखा जाएगा।
इस्राइल और हमास के संघर्ष की संवेदनशीलता को देखते हुए पहचान जाहिर न करने की अपील के साथ लोगों ने बताया, बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और बहुत कुछ बदल सकता है। कुछ अमेरिकी अधिकारी विकल्पों को समय से पहले या असंभावित भी मानते हैं। हालांकि, विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार को इस चुनौती की ओर इशारा किया जब उन्होंने सीनेट पैनल को बताया कि अमेरिका गाजा के भविष्य के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है।
खबरों के मुताबिक ब्लिंकन शुक्रवार, तीन नवंबर को एक बार फिर इस्राइल का दौरा करेंगे। सीनेट विनियोग समिति के अनुसार, जब तक गाजा पर हमास का शासन है, अमेरिका यथास्थिति में बदलाव नहीं कर सकता। इस्राइल गाजा को चला रहा है या नियंत्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी गाजा का संचालन नहीं कर सकता। इस्राइली खुद भी यही प्रस्ताव देते हैं। ब्लिंकन के अनुसार, अलग-अलग संभावित क्रमपरिवर्तन को अमेरिका बहुत करीब से देख रहा है, ऐसा अन्य देश भी कर रहे हैं।"
अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता एड्रिएन वॉटसन के हवाले से मंगलवार रात आई ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में बताया गया कि "शांति सेना के हिस्से के रूप में गाजा में अमेरिकी सैनिकों को भेजना ऐसा कुछ नहीं है जिस पर विचार किया जा रहा है या चर्चा चल रही है।" अमेरिकी विदेश विभाग ने भी योजनाओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि इस्राइली अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि उनका गाजा पर कब्जा करने का इरादा नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि 7 अक्टूबर के हमले के बाद गाजा पट्टी पर हमास का शासन अस्वीकार्य है। बता दें कि आतंकी हमले में 1400 इस्राइली लोगों की मौत हुई थी। 200 से अधिक लोगों को बंधक बनाया गया।
खबरों के मुताबिक इस्राइल और अमेरिका दोनों का मानना है कि फलस्तीनी प्राधिकरण गाजा पर शासन कर सकेगा, इस बात के भी बहुत कम सबूत हैं। वेस्ट बैंक पर शासन कर रहा फलस्तीनी प्राधिकरण गाजा पर कब्ज़ा करने का इच्छुक है या नहीं, क्या प्राधिकरण सक्षम होगा? इन सवालों के ठोस जवाब नहीं मिले हैं। बता दें कि अमेरिका और यूरोपीय संघ ने हमास को आतंकवादी समूह नामित किया है।
गाजा में पुनर्वास को लेकर सभी तीन विकल्प राष्ट्रपति जो बाइडन और खाड़ी देशों सहित अन्य देशों के लिए भी राजनीतिक खतरा पैदा कर सकते हैं। इस्राइल पर भी इसका असर पड़ेगा। बाइडन प्रशासन की नीतियों से परिचित एक व्यक्ति के अनुसार, बाइडन का मानना है कि अमेरिकी सैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी को भी नुकसान पहुंचाना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है। अमेरिका इस तरह का निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, यह भी अभी तक स्पष्ट नहीं है कि अरब देश गाजा पट्टी में पुनर्वास पर दिलचस्पी लेंगे या नहीं।
बाइडन और अन्य अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि टकराव खत्म करने को लेकर संप्रभु फलस्तीन जरूरी है, लेकिन वास्तव में उस परिणाम तक कैसे पहुंचा जाए? इस सवाल पर सार्वजनिक या निजी चर्चाओं में बमुश्किल ही चर्चा हुई है। इस्राइल का कहना है कि उसका सैन्य अभियान महीनों तक चल सकता है, और इसके परिणामस्वरूप गाजा के आसपास एक बफर जोन बन जाएगा।
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, एक विकल्प अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के सैनिकों से जुड़ा है। इन देशों की सेनाओं से समर्थित क्षेत्र के देशों को गाजा की अस्थायी निगरानी का जिम्मा दिया जा सकता है। आदर्श रूप से, इसमें सऊदी अरब या संयुक्त अरब अमीरात जैसे अरब देशों का प्रतिनिधित्व भी शामिल होगा।
दूसरा विकल्प बहुराष्ट्रीय बल और पर्यवेक्षक समूह पर आधारित एक शांति सेना है जो मिस्र और इस्राइल के बीच शांति संधि की शर्तों को लागू करने के लिए सिनाई प्रायद्वीप पर और उसके आसपास काम करता है। घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले शख्स के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल इस विकल्प को विचार करने योग्य मानता है।
तीसरा विकल्प गाजा पट्टी का अस्थायी शासन संयुक्त राष्ट्र की छतरी के नीचे होगा। इस्राइल की सोच से परिचित एक व्यक्ति के अनुसार, इससे संयुक्त राष्ट्र द्वारा दी गई वैधता का लाभ होगा, लेकिन इस्राइल इसे अव्यवहारिक मानता है। इस्राइल का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र ने बहुत अच्छे काम नहीं किए हैं। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, युद्धविराम की अपील से भड़के इस्राइली मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस को "आतंकवादी समर्थक" करार दिया था। गुटेरस ने कहा था, इस बात को स्वीकारना होगा कि 7 अक्टूबर के रॉकेट हमले "बिना किसी एक्शन के शून्य में नहीं हुए थे।"