पाकिस्तान जिस समय सियासी उथल-पुथल में उलझा हुआ है, आतंकवाद के मोर्चे पर उसके सामने एक नई चुनौती खड़ी होने का संकेत है। तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) और बलूच अलगाववादियों के उग्रवादी हमलों से पहले से परेशान पाकिस्तान को अब आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
चार मार्च के हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट- खोरासान (आईएस-के) ले ली। दूसरे हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान (आईएस-पी) ने ली। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ये दोनों गुट पाकिस्तान में सक्रिय हैं, इसकी जानकारी उन्हें है। लेकिन इनका अधिक प्रभाव देश के किस इलाके में है, इस बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है।
एक बड़े सुरक्षा अधिकारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘पाकिस्तान ने अपने सुरक्षा साधनों को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और टीटीपी से मुकाबले में झोंक रखा है। तमाम आतंकवादी गुट जिस तरह अलग-अलग तरह के निशाने चुन रहे हैं, उससे पाकिस्तान के लिए उनका मुकाबला करना कठिन हो गया है।’ टीटीपी और बीएलए आम तौर पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं। जबकि आईएस ने आम नागरिकों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
आईएस के काम करने के तरीकों को समझने के लिए निक्कई एशिया ने पोलैंड स्थित विशेषज्ञ प्रजेमिस्लाव लेसिंस्की से बात की। लेसिंस्की वॉरसॉ स्थित वॉर स्टडीज यूनिवर्सिटी में अफगान विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा- ‘आईएस ऐसे निशाने चुनता है, जहां अधिक से अधिक लोग हताहत हो सकें। इसलिए यह अपेक्षा रखी जा सकती है कि पाकिस्तान में इस संगठन का मुख्य निशाना धार्मिक अल्पसंख्यक- खास कर शिया समुदाय के लोग होंगे। लेकिन वे ऐसे ठिकानों पर भी हमले कर सकते हैं, जिनका संबंध अफगान तालिबान से हो।’