जी-7 देशों के विशेष शिखर सम्मेलन का इस हफ्ते आयोजन यूक्रेन पर रूसी हमले पर विचार-विमर्श के लिए हुआ। इस दौरान इन नेताओं के बीच चर्चा का एक खास मुद्दा दुनिया पर गहरा गया खाद्य संकट था। मीडिया का ज्यादा ध्यान युद्ध संबंधी चर्चाओं पर रहा। लेकिन जी-7 नेताओं ने खाद्य पदार्थों की कमी और महंगाई पर भी अपना काफी ध्यान लगाया। बैठक के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘खाद्य सुरक्षा के लिए पहल’ नाम से अपना एक अलग दस्तावेज पेश किया।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने दस्तावेज में कहा है कि दुनिया के सामने अभूतपूर्व खाद्य संकट खड़ा हो गया है। यह सीधे तौर पर रूस के युद्ध छेड़ने की वजह से हुआ है। मैक्रों ने कहा है कि अभी भी हालात गंभीर हैं, लेकिन अगले 12 से 18 महीनों में यह और बदतर हो जाएगी। जी-7 बैठक को संबोधित करते हुए मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अपील की कि वे यूक्रेन को खेती करने का मौका दें, वरना कई देशों को अकाल का सामना करना पड़ेगा।
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी- यूनाइडेट नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (अंकटाड) अपनी एक रिपोर्ट में कह चुका है कि यूक्रेन युद्ध के कारण सभी देशों को खाद्य पदार्थों और ईंधन की महंगाई का सामना करना पड़ेगा। लेकिन इसका सबसे खराब असर विकासशील देशों पर होगा, जहां गरीब घरों को भोजन जुटाने पर अपनी आमदनी का ज्यादा हिस्सा खर्च करना पड़ेगा। इस स्थिति के कारण दुनिया भर में भूख और दूसरी आम मुसीबतें बढ़ेंगी।
रूस और यूक्रेन गेहूं और सूरजमुखी जैसे पैदावारों के प्रमुख निर्यातक हैँ। इसके अलावा युद्ध की वजह से सप्लाई चेन संबंधी दिक्कतें भी खड़ी हुई हैँ। इन सबका नतीजा खाद्य संकट के रूप में सामने आ रहा है।