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Jeddah: शीर्ष मुस्लिम राजनयिकों ने हानिया की मौत का जिम्मेदार इस्राइल को ठहराया, बदला लेने की खाई कसम

Thu, 08 Aug 2024 08:22 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेद्दाह

सार

सऊदी अरब के तटीय शहर जेद्दाह में स्थित इस्लामिक सहयोग संगठन के मुख्यालय में विदेश मंत्री एकत्र हुए। बैठक के बाद संगठन ने बयान जारी कर कहा कि वह इस जघन्य हमले के लिए इस्राइल को पूरी तरह जिम्मेदार मानता है।
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इस्माइल हानिया - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बीते माह के आखिरी दिन हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की ईरान की राजधानी तेहरान में हत्या कर दी गई थी। हानिया की मौत का जिम्मेदार लगातार इस्राइल को माना जा रहा है। हालांकि, इस्राइल ने अभी तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। इन सबके बीच, शीर्ष मुस्लिम राजनयिकों ने कहा कि हानिया की हत्या के लिए इस्राइल पूरी तरह से जिम्मेदार है। साथ ही चेतावनी दी कि इससे क्षेत्र अस्थिर हो सकता है। 

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बदला लेने की खाई कसम
ईरान ने सऊदी स्थित इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की बुधवार को एक बैठक बुलाई थी। इस दौरान यहां मौजूद राजनयिकों ने हानिया की मौत का बदला लेने की कसम खाई है। वहीं, इस्राइल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। बता दें, हानिया कतर में रहता था और गाजा पट्टी में युद्ध को समाप्त करने के लिए हो रही बातचीत में एक प्रमुख खिलाड़ी था।

जेद्दाह में जमा हुए थे विदेश मंत्री
सऊदी अरब के तटीय शहर जेद्दाह में स्थित इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के मुख्यालय में विदेश मंत्री एकत्र हुए। बैठक के बाद संगठन ने बयान जारी कर कहा कि वह इस जघन्य हमले के लिए इस्राइल को पूरी तरह जिम्मेदार मानता है। साथ ही इस हमले को ईरान की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन भी करार दिया। 
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क्या बोले ओआईसी अध्यक्ष?
सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री ने बुधवार तक हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की थी। हालांकि, सऊदी सरकार के एक बयान के अनुसार अब उप विदेश मंत्री ने हमले के इस बयान पर सहमति जताई है। वहीं, वर्तमान ओआईसी अध्यक्ष गाम्बिया के विदेश मंत्री मामादोउ तंगारा ने कहा कि हनीया की मौत से मध्य पूर्व में जारी युद्ध और खतरनाक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल मौजूदा तनाव को बढ़ाने का काम करेगा।

उन्होंने कहा कि हानिया की हत्या फलस्तीनी मुद्दे को शांत नहीं करेगी, बल्कि इसे और बढ़ाएगी। फलस्तीनियों के लिए न्याय और मानवाधिकारों की तत्काल आवश्यकता को दिखाती है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के मूलभूत सिद्धांत हैं। इन सिद्धांतों का सम्मान करने से गहरा प्रभाव पड़ता है। वहीं, उनके उल्लंघन के समान रूप से महत्वपूर्ण परिणाम होते हैं।

ईरान के मंत्री ने भी दी चेतावनी
ईरान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अली बाघेरी ने तेहरान के विचार को दोहराया कि जवाब देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, इस्राइली शासन के हमलों और उल्लंघनों के खिलाफ (संयुक्त राष्ट्र) सुरक्षा परिषद द्वारा किसी भी उचित कार्रवाई के अभाव में, ईरान के पास इस शासन के आक्रमणों के खिलाफ वैध बचाव के अपने निहित अधिकार का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

अमेरिका ने जताई उम्मीद
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने बुधवार को उम्मीद जताई कि ईरान के साथ संबंध रखने वाले सभी पक्ष ईरान पर उसी तरह दबाव डालें, जैसे हम इस्राइल सरकार पर दबाव डालते रहे हैं कि उन्हें संघर्ष को बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।

मिलर ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ओआईसी बैठक में भाग लेने वाले कई देशों के संपर्क में है और उनका मानना है कि इस बात पर व्यापक सहमति है कि तनाव बढ़ने से क्षेत्र के सामने आने वाली समस्याएं और बढ़ेंगी।

सात अक्टूबर को हुए हमले का किया था नेतृत्व
सात अक्टूबर को दक्षिणी इस्राइल में हुए आतंकवादी हमले में 12 सौ लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोगों को बंधक बनाया गया था। हमास के जिस समूह ने इस्राइल पर हमला किया था, उसका नेतृत्व याह्या सिनवर ने ही किया था।

31 जुलाई को तेहरान में हुई थी हानिया की हत्या
बता दें कि हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की ईरान की राजधानी तेहरान में हत्या कर दी गई थी। इस्माइल हानिया की हत्या का आरोप इस्राइल पर लगा है। हालांकि अभी तक इस्राइल ने इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस्माइल हानिया को साल 2018 में अमेरिका ने आतंकवादी घोषित किया था।

जानिए कौन था इस्माइल हानिया
इस्माइल हानिया, हमास की राजनीतिक शाखा का प्रमुख था। साल 2006 में फलस्तीन के आम चुनावों में हमास की जीत के बाद से ही संगठन में हानिया का दबदबा बढ़ने लगा था। उसे गाजा पट्टी में फलस्तीनी प्राधिकरण का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। इस दौरान मिस्र से गाजा पट्टी में आयातित वस्तुओं पर भारी कर लगाकर हानिया ने अपनी संपत्ति कई गुना बढ़ा ली। 2014 में हमास द्वारा सभी व्यापार पर 20 प्रतिशत कर लगाए जाने की घोषणा की गई थी। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन करों की वजह से हमास के 1,700 टॉप कमांडर करोड़पति बन गए। इस्राइल पर बीते साल सात अक्तूबर को हुए हमले के पीछे भी इस्माइल हानिया की अहम भूमिका थी और यही वजह थी कि हानिया इस्राइली सुरक्षा बलों के निशाने पर था।

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