ऐसा लगता है कि ईरान परमाणु डील को पुनर्जीवित करने के लिए बातचीत की बनी संभावना में इस्राइल ने फिर से पलीता लगा दिया है। इस डील को रोकने के लिए गुजरे महीनों में उसने कई भड़काऊ कार्रवाइयां की हैं। उनमें जो बाइडन के अमेरिका का राष्ट्रपति पद संभालने से ठीक पहले कराई गई ईरान के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक की हत्या भी शामिल है।
ईरान इस नतीजे पर है कि रविवार को उसके परमाणु ठिकाने पर हुए साइबर हमले के पीछे इस्राइल का हाथ है। ईरान ने इस हमले का बदला लेने का एलान किया है। उसके विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने सोमवार को यह भी कहा कि अगर अमेरिका उस पर से प्रतिबंध नहीं हटाता, तो वह 2015 में हुए समझौते का उल्लंघन और तेज कर देगा।
गौरतलब है कि हाल में अमेरिका ने इस समझौते को पुनर्जीवित करने की बातचीत में शामिल होने का इरादा जताया था। मगर ईरान के नतांज परमाणु ठिकाने पर उस समय हमला हुआ, जब अमेरिकी रक्षा मंत्री ऑस्टिन लॉयड इस्राइल की यात्रा पर थे।
बताया जाता है कि इस साइबर हमले से नतांज परमाणु संयंत्र को काफी नुकसान हुआ है। इसकी वजह से वहां कुछ समय के लिए बिल्कुल अंधेरा छा गया। इसके बाद बाइडन प्रशासन ने सफाई दी कि इस हमले में अमेरिका कोई हाथ नहीं है। लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने इस बारे में कुछ कहने से इनकार किया कि क्या इस हमले से जारी परमाणु कूटनीति में कोई बाधा पड़ेगी। उन्होंने ऐसी कोई उम्मीद नहीं जताई कि हमले के बावजूद ईरान वियना में बुधवार से शुरू हो रही परोक्ष परमाणु वार्ता में भागीदारी करेगा।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक खबर के मुताबिक बुधवार की वार्ता शुरू होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी और इस्राइली अधिकारी दूसरे दौर की उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। इसमें विचार का मुद्दा ईरान होगा। इस बातचीत में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान और इस्राइली दल का नेतृत्व वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मायर बेन-शबात करेंगे।
पिछले महीने ऐसी ही एक बैठक दोनों पक्षों के बीच हुई थी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित खुफिया सूचनाओं का आदान- प्रदान किया गया था। उस बैठक में ये सहमति बनी थी कि दोनों पक्ष एक दूसरे को अंधेरे में रखते हुए कोई कदम नहीं उठाएंगे।
जानकारों के मुताबिक अभी ये साफ नहीं है कि नातंज संयंत्र पर हुए हमले की जानकारी अमेरिका को पहले से दी गई थी या नहीं। इसके पहले हाल में इस्राइल ने ईरान के जहाजों पर भी हमले किए थे। उन हमलों की पूर्व सूचना अमेरिका को दी गई थी या नहीं, उस बारे में भी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन सकी के बयानों को जरूर इस बात का संकेत माना गया है कि बाइडन प्रशासन ने इन दोनों हमलों को पसंद नहीं किया है।
दूसरी तरफ इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के साथ परमाणु वार्ता शुरू करने का लगातार खुल कर विरोध कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री की मौजूदगी में कहा कि इस्राइल किसी भी हाल में ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देगा। कुछ समय पहले उन्होंने यह भी कहा था कि अगर अमेरिका और ईरान में कोई करार होता है, तो उसे मानने के लिए इस्राइल बाध्य नहीं होगा। इसे इस बात का संकेत समझा गया है कि ईरान के खिलाफ अपनी आक्रामक कार्रवाइयां इस्राइल जारी रखेगा।
नातंज प्लांट पर हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटारेस को लिखे एक पत्र में ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस्राइल ने गंभीर युद्ध अपराध किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस्राइल ने ऐसा परमाणु वार्ता में रुकावट डालने के मकसद से किया। गौरतलब है कि बुधवार से वियना में शुरू हो रही वार्ता परमाणु डील को पुनर्जीवित करने की दिशा में हाल में उठाया गया सबसे अहम कदम है।
फिलहाल ईरान ने अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। वियना वार्ता यूरोपियन यूनियन के वार्ताकारों के माध्यम से होनी तय है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान अगर सभी प्रतिबंधों को उठाने की मांग पर अडिग रहा, तो बातचीत में गतिरोध पैदा हो जाएगा। गौरतलब है कि ईरान मांग कर रहा है कि उसके परमाणु डील के प्रति वचनबद्धता जताने से पहले अमेरिका सभी प्रतिबंधों को हटा ले।