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Iran: हसन नसरल्ला की मौत के बाद फंस गया ईरान, इस्राइल के आक्रामक रुख से बेबस हुई खोमैनी की सरकार

Mon, 30 Sep 2024 09:54 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

एक अमेरिकी थिंक टैंक से जुड़े विशेषज्ञ करीम सदजादपोर का कहना है कि ईरान के पश्चिम एशिया में शक्ति विस्तार में हिजबुल्ला की भूमिका अहम है। यही वजह है कि हिजबुल्ला चीफ की मौत ईरान के लिए बड़ा झटका है, लेकिन उन्हें लगता है कि ईरान अभी भी इस्राइल के साथ सीधे युद्ध में नहीं उलझना चाहेगा। 
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इस्राइली हमलों से दुविधा में ईरान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस्राइल के हमले में हिजबुल्ला चीफ हसन नसरल्ला की मौत ने पश्चिम एशिया के तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अब सभी की निगाहें ईरान पर लगी हैं क्योंकि हिजबुल्ला को खड़ा करने में ईरान की भूमिका रही है और ऐसे में हिजुबल्ला प्रमुख की मौत ईरान के लिए बड़ा झटका है। हालांकि पश्चिम एशिया की राजनीति के विशेषज्ञों की मानें तो ईरान इस समय गंभीर दुविधा का शिकार है और अगर ये कहा जाए कि इस्राइल ने जिस आक्रामकता के साथ गाजा के बाद लेबनान और यमन में हमले किए हैं, उससे ईरान फंस गया है और उसके नेतृत्व को अभी तत्कालिक तौर पर समझ नहीं आ रहा है कि किस तरह से इस्राइल को जवाब दिया जाए। 
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इस्राइल के साथ सीधे युद्ध में नहीं उलझना चाहेगा ईरान
शुक्रवार को लेबनान में इस्राइल के हवाई हमले में हसन नसरल्ला के साथ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल अब्बास निलफोरुशान की भी मौत हो गई। इसके बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खोमैनी ने नसरल्ला और अपने जनरल की मौत का बदला लेने की बात कही। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा ने कहा कि हसन नसरल्ला को मारकर इस्राइल ने अपने तबाही को बुलावा दिया है। एक अमेरिकी थिंक टैंक से जुड़े विशेषज्ञ करीम सदजादपोर का कहना है कि ईरान के पश्चिम एशिया में शक्ति विस्तार में हिजबुल्ला की भूमिका अहम है। यही वजह है कि हिजबुल्ला चीफ की मौत ईरान के लिए बड़ा झटका है, लेकिन उन्हें लगता है कि ईरान अभी भी इस्राइल के साथ सीधे युद्ध में नहीं उलझना चाहेगा। 

आर्थिक संकट में ईरान
एक अन्य विशेषज्ञ अली वाएज का कहना है कि ईरान का नेतृत्व इस समय गंभीर दुविधा में है और इस्राइल के प्रतिरोध के लिए जो उसने शक्तियां तैयार की थीं, वो सभी इस्राइल के हमले झेलकर कमजोर हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इस समय इस्राइल को नहीं रोक पा रहा है और खुद को कमजोर भी महसूस कर रहा है। बीती जुलाई में ही तेहरान में हमला कर इस्राइल ने हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की हत्या कर दी थी। उस वक्त भी ईरान ने इस्राइल को जवाबी कार्रवाई की धमकी दी थी, लेकिन अभी तक वह कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। 
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अब हिजबुल्ला चीफ की मौत से ईरान को फिर बड़ा नुकसान हुआ है। हसन नसरल्ला के साथ ही हिजबुल्ला के कई शीर्ष कमांडर ढेर हो चुके हैं। जिससे हिजबुल्ला भी कमजोर हुआ है और अब उसे फिर से खड़ा करने में ईरान को काफी आर्थिक और सैन्य संसाधन लगाने होंगे। अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों से ईरान पहले ही आर्थिक तौर पर जूझ रहा है और ऐसे में हिजबुल्ला को फिर से खड़ा करना ईरान के लिए काफी चुनौती भरा होगा। 

ईरान के अगले कदम पर पूरी दुनिया की निगाहें
गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान इस्राइल को धमका रहा है, लेकिन उसने इस्राइल पर सीधे हमले से दूरी बनाकर रखी है। बीते अप्रैल में ईरान ने इस्राइल पर हवाई हमला भी किया था, लेकिन पहले ही इसकी चेतावनी दे दी थी, जिससे इस्राइल को इस हमले से कोई नुकसान नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हिजबुल्ला को तैयार करने में 40 साल लगाए हैं और अब ईरान नहीं चाहेगा कि उसकी चालीस साल की मेहनत बर्बाद हो जाए। साथ ही ईरान ने यमन में हूती और सीरिया में भी अपने प्रोक्सी समूह तैयार किए हैं। ईरान हिजबुल्ला को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेगा, लेकिन इसमें समय लग सकता है। बीते दिनों पेजर और वॉकी टॉकी धमाकों के बाद से हिजबुल्ला और ईरान के बीच संचार भी बाधित हुआ है।  फिलहाल ईरान पर दबाव है कि वह इस्राइल को मुंह तोड़ जवाब दे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां उसके पक्ष में नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। 
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