ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद (फाइल)
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Iran Elections: ईरान में पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 28 जून को होने वाले चुनाव के लिए संसद के स्पीकर समेत छह नामों पर मुहर लगी है। इससे पहले दो जून को आई खबर के मुताबिक अहमदीनेजाद ने 28 जून को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए बीते रविवार को नामांकन किया था। गौरतलब है कि इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर हादसे में विगत 19 मई को मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद ईरान में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं।
आठ साल राष्ट्रपति रह चुके हैं; तीसरा कार्यकाल मिलना मुश्किल
कट्टरपंथी नेता की छवि रखने वाले पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भावी राष्ट्राध्यक्ष बनने की रेस में शामिल सबसे चर्चित नाम हैं। हालांकि, अब उनके चुनाव लड़ने पर ग्रहण लगता दिख रहा है। अहमदीनेजाद साल 2005 में ईरान के राष्ट्रपति चुने गए थे। वे लगातार आठ साल (दो कार्यकाल) यानी साल 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे।
सर्वोच्च नेता से टकराव के कारण 2021 में भी अयोग्य करार दिए गए थे
बता दें कि ईरान का राष्ट्रपति रहने के दौरान अहमदीनेजाद ने अयातुल्लाह अल खुमैनी को चुनौती दी थी। इसी कारण करीब तीन साल पहले भी उन्हें राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। 2021 में अहमदीनेजाद को ईरान संवैधानिक निगरानी संस्था, गार्जियन काउंसिल ने अयोग्य करार दिया था।
इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ मुखर रहे हैं
गौरतलब है कि पश्चिम एशियाई और इस्लामिक मुल्कों की सियासत को देखते हुए ईरान का राष्ट्रपति चुनाव बेहद रोचक माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अहमदीनेजाद को अमेरिका का कट्टर विरोधी माना जाता है। अहमदीनेजाद इस्राइल के भी घोर विरोधी माने जाते हैं और वह इस्राइल को दुनिया के नक्शे से मिटाने की बात कह चुके हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता पर दबाव; पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण तनाव
खबरों के मुताबिक अहमदीनेजाद की छवि और उनके जनाधार को देखते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अल खुमैनी पर भी दबाव है। पिछले लगभग 8-10 महीने में ईरान और इस्राइल के बीच भी तनाव बढ़ा है। तनाव का एक कारण इस्राइल और हमास के बीच जारी हिंसक टकराव है। सात अक्तूबर, 2023 से शुरू हुई लड़ाई में अब तक 36 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 80 हजार से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। गाजा में इस्राइली सेना की कार्रवाई के कारण अभूतपूर्व मानवीय संकट पैदा हुआ है, यहां तक कि अस्पतालों और राहत शिविरों पर बमबारी में भी लोग मारे जा रहे हैं। बीते आठ महीने से अधिक समय से युद्ध जारी है।