अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की मुख्य अभियोजक फाताउ बेनसौदा फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते पर ज्यादतियों और मानव अधिकारों के हनन के आरोप में औपचारिक जांच के लिए हरी झंडी दे दी है। बेनसौदा ने लगभग तीन साल तक इन आरोपों की शुरुआती जांच की। अब उन्होंने सिफारिश की है कि दुतेर्ते के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कराई जाए। दुतेर्ते पर आरोप है कि उन्होंने नशीले पदार्थों और अन्य अपराधों के खिलाफ अपनी मुहिम के दौरान हजारों लोगों की बिना मुकदमा चलाए हत्या करवा दी। बेनसौदा ने एक नवंबर 2011 से 16 मार्च 2029 तक के बीच की घटनाओं की शुरुआती जांच की है।
जिस अवधि को इस जांच में शामिल किया गया, उसमें कुछ समय तक दुतेर्ते फिलीपींस के दक्षिणी शहर दावाओ में मेयर थे। दावाओ उनकी कथित रूप से क्रूर कार्रवाइयों का पहला गवाह बना था। बेनसौदा की ताजा सिफारिश का पीड़ित परिवारों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। लेकिन दुतेर्ते ने बेनसौदा को ‘पागल’ और उनकी सिफारिश को बकवास बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि बेनसौदा की ताजा पहल का नतीजा दुतेर्ते और अन्य फिलीपीनी अधिकारियों पर औपचारिक मुकदमा चलने के रूप में सामने आ सकता है। लेकिन फिलीपीन में दुतेर्ते की लोकप्रियता कायम है। साथ ही सत्ता के तमाम केंद्रों पर उन्होंने अपना दबदबा बना रखा है। अगले साल फिलीपीन में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। देश के विपक्ष को अंदेशा है कि राष्ट्रपति उस दौरान धांधली करने की कोशिश करेंगे। एक चर्चा यह भी है कि अगले साल दुतेर्ते अपनी बेटी सारा दुतेर्ते को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दुतेर्ते के खिलाफ बेनसौदा ने जब शुरुआती जांच शुरू की, तब हेग स्थित आईसीसी के अधिकार क्षेत्र का सवाल उठा था। तब एक लोकप्रिय नेता के खिलाफ कार्रवाई करने की उसकी इच्छाशक्ति को लेकर भी संदेह जताए गए थे। लेकिन बेनसौदा ने धीरज के साथ अपना काम जारी रखा।
गौरतलब है कि आईसीसी हाल में कई देशों के सत्ताधारियों का निशाना रही है। उसने जब अफगानिस्तान में अमेरिका के कथित युद्ध अपराधों की जांच शुरू की, तब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अदालत के कई जजों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। जो बाइडेन प्रशासन ने उनमें से कुछ प्रतिबंधों को हटा लिया है। इसके बावजूद अमेरिका ने अभी तक आईसीसी के गठन के लिए हुई रोम संधि पर दस्तखत नहीं किए हैं। चीन और रूस जैसे बड़े देशों ने भी इस पर दस्तखत नहीं किए हैं। इस कारण आईसीसी के फैसलों की इन देशों में कोई मान्यता नहीं होती।
खबर है कि बेनसौदा की सिफारिश की खबर आते ही दुतेर्ते ने कई वकीलों और विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा किया। दुतेर्ते खुद भी पेशे से वकील रह चुके हैं। 2019 में जब उनके खिलाफ जांच शुरू हुई थी, तब दुतेर्ते ने फिलीपीन को रोम संधि से हटाने का एलान किया था। 2020 में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद की बठक में फिलीपनी के न्याय मंत्री ने कहा था कि मानव अधिकार के हनन के मामलों में फिलीपीन की अदालतें सर्वोच्च हैँ। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस तरह दुतेर्ते ने अपने बचाव के इंतजाम कर लिए हैं। इसलिए आईसीसी की औपचारिक जांच या वहां संभावित मुकदमे में फिलीपीन सरकार कोई सहयोग करेगी, इसकी संभावना कम है।